– एक लाइब्रेरी जिसने देश को दिए कई आईएएस और पीसीएस

हल्द्वानी, डीडीसी। कहते है ‘पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’ तो अगर आपको एक बड़ा अफसर बनना हो और जेब में धड़ा न हो… तो क्या तब भी हौसलों से उड़ान भरी जा सकती है। जवाब है नहीं, लेकिन लिखपढ कर बिना पैसों के बड़ा अफसर बना जा सकता है और इसकी मिसाल है उत्तराखंड के हल्द्वानी की लोकमणि दुम्का सेवादीप निकेतन लाइब्रेरी। अमूमन लाइब्रेरी पढ़ने के लिए होती है न कि पढ़ाने के लिए, लेकिन इस लाइब्रेरी ने पढ़ने का मौका भी दिया, पढ़ाया भी और वो भी निःशुल्क। आज निःशुल्क शिक्षा पाकर जाने कितने होनहार और गरीब के बच्चे IAS और PCS बन गए। यह सब संभव हुआ, लोगो के सहयोग और मनोज पाठक की सोच से।

30 अफसर कर रहे देश सेवा
लालडांठ रोड पर जय गंगा इन्द्रपुरम में यह लाईब्रेरी है। इस लाइब्रेरी ने अभी तक एक आईएएस, दो पीसीएस, चार अस्सिटेंट प्रोपफेसर, 13 एलटी, 8 सेना सीडीएस में और 2 डाक्टर दिए है। हैरानी ये कि उक्त सभी हौनहारों ने अपफसर बनने के लिए एक रूपया भी खर्च नहीं किया। सारा खर्चा लाइबे्ररी ने उठाया ताकि युवाओं और देश का भविष्य उज्जवल हो।

संयोग से प्रयोग और मिसाल बन गई लाइब्रेरी
बात 2014 की है समाजसेवी और वरिष्ठ भाजपा नेता मनोज पाठक युवाओं को गलत राह पर जाता देखते थे, देखते उन सेवानिवृत्त लोगो को जिनके पास समय ही समय था। पाठक ने सेवानिवृत्त लोगों को एक साथ जोड़ा। किसी ने ईंट दी तो किसी ने रेता, स्व. किशोर दुम्का ने जमीन दी, उत्थान परिषद का सहयोग और जो कसर बची उसे मनोज पाठक ने पूरा किया। 24 पफरवरी 2016 को लाइब्रेरी का उद्घाटन हो गया। संघ के सह कारवा डा. कृष्णगोपाल, सांसद भगत सिंह कोश्यारी और द ग्रेड खली इसके साक्षी बने।

शिक्षकों ने चरितार्थ किया सेवा भाव
पढ़ना है और कुछ बनना है तो लाइब्रेरी में सब मुफ्रत है। यहां पढ़ाने वाले दस शिक्षक इसकी बानगी है। शिक्षक मनमोहन जोशी की अगुवाई में यहां दस शिक्षकों की टीम बच्चों को मुफ्रत शिक्षा देते है। जबकि कोटा के दीपक
जोशी;बंसल क्लासेसद्ध प्रतियोगी परिक्षाओं की नवीनतम सामाग्री उपब्लध कराते है और वह भी निःशुल्क।

जलेबी बनाने वाले का बच्चा बना टाॅपर
पंतनगर की प्रवेश परिक्षा अहम होती है, और हर किसी को प्रवेश मिलता भी नहीं, लेकिन एक जलेबी बनाने वाले और दूसरे सरिया काटने वाले के बेटों ने यहां प्रवेश भी लिया और टाॅप भी किया। दोनो दूसरे व तीसरे नंबर के टाॅपर थे। आज दो शिफ्रट में चलने वाली क्लास में ऐसे तीन सौ हौनहार प्रतियोगी परिक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कर रहे है। यहां 300 रुपये प्रतिमाह देने होतें हैं और ये व्यवस्था भी पिछले माह से शुरू की गई है।

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