– दो बार कामयाब रहा भाजपा का पैंतरा, अब सल्ट में फेंका सहानुभूति कार्ड

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। सल्ट में विधानसभा उप चुनाव होने जा रहा है और इसे वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल माना जा रहा है। सुरेंद्र सिंह जीना की मृत्यु से खाली हुई सल्ट की सीट अब भाजपा और कांग्रेस के लिए नाक का सवाल बन चुकी है। भाजपा के खिलाफ इस चुनावी जंग में कांग्रेस अपनी पुरानी तलवार ‘गंगा पंचोली’ के साथ उतरी है। गंगा वही पुरानी तलवार हैं जिन्होंने बीते चुनाव में भाजपा को नाको चने चबवा दिए थे। वहीं भाजपा ने एक बार फिर अपना पुराना पैंतरा सल्ट में आजमाया है और वो इसलिए कि पहले दो बार ये सहानुभूति कार्ड भाजपा को विजयश्री दिला चुका है। अब पार्टी ने दिवंगत सुरेंद्र सिंह जीना के बड़े भाई महेश जीना के बूते सहानुभूति कार्ड खेला है। भाजपा को भरोसा है कि सल्ट की सीट फिर उनकी झोली में होगी।

प्रकाश पंत और मगन लाल की पत्नी पर लगाया था दांव
30 मार्च को सुरेंद्र सिंह जीना के बड़े भाई महेश जीना भाजपा की ओर से अपना नॉमिनेशन दाखिल करेंगे। अगर आपको याद हो तो इससे पहले भाजपा विधायक मगन लाल शाह के निधन पर उनकी पत्नी मुन्नी देवी शाह और मंत्री प्रकाश पंत के निधन पर उनकी पत्नी चंद्रा पंत को चुनाव लड़वा चुकी है। इन दोनों ही उपचुनाव में बीजेपी को सहानुभूति कार्ड का फायदा मिला और वो जीत दर्ज कराने में सफल रही। अब देखना दिलचस्प होगा कि सल्ट की सियासत में सहानुभूति कार्ड कितना काम करता है।

आसान नही होगा गंगा से पार पाना
बीजेपी के लिए उपचुनाव जीतना चुनौती है, क्योंकि विपक्षी कांग्रेस भी इस सीट पर अच्छा खासा दबदबा रखती है। कांग्रेस को इस सीट पर कमजोर आंकना भाजपा की बड़ी भूल साबित हो सकती है। वजह कि कांग्रेस पिछले चुनाव में मात्र 3000 के अंतर से हारी थी। 2017 के विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस नेत्री गंगा पंचोली को अंतिम समय में पार्टी ने टिकट दिया था। बावजूद इसके पंचोली ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। तभी हम कह रहे हैं कि कांग्रेस पुरानी तलवार में नई धार के साथ चुनावी रण में उतरी है।

ये तीरथ सिंह रावत का भी टेस्ट है
त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड की सियासत से आउट हो चुके हैं। सल्ट के उप चुनाव में अब नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की साख दांव पर है और इस साख को बचाने के लिए उन्होंने 6 सदस्यीय टीम को सल्ट में उतारा है। वह खुद सल्ट से चुनाव नही लड़े। जबकि कांग्रेस उन्हें चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दे रही थी। ये सीट हर हाल में जीतनी है, इसीलिए सहानुभूति कार्ड खेला गया। 2022 का चुनाव सिर पर है और अगर ऐसे में जीत मिलती है तो तीरथ न सिर्फ पार्टी के भीते मजबूत होंगे, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी उनका कद बढ़ेगा।

17 अप्रैल को मतदान, 2 मई को रिजल्ट
सल्ट विधानसभा में कुल 95,240 मतदाता हैं। जिनमें से 48,682 पुरुष और 46,559 महिला मतदाता हैं। पूरी विधानसभा में 136 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। जिनमें 16 संवेदनशील, 7 अति संवेदनशील हैं। सल्ट में 31 मार्च को नामांकन पेपरों की स्कूटनी होगी। 3 अप्रैल तक कैंडिडेट अपना नाम वापस ले सकेंगे। 17 अप्रैल को वोटिंग के बाद 2 मई को काउंटिंग होगी। कोरोना की वजह से सल्ट उपचुनाव में सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक वोटिंग होगी। जबकि अमूमन वोटिंग का वक्त सुबह 8 से शाम 5 बजे तक होता है।

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