– वर्ष 1952 में हुए एक एक्‍सीडेंट के बाद यहां सब कुछ बदल गया

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। 21वीं सदी में भूत जैसी बात सुनने में अजीब लगती है। भूत सच हो न हो, लेकिन भूत का खौफ सच है। ये कहानी भूत के एक गांव की है, जहां इंसान नहीं भूत रहते हैं और भूतों के डर से ये गांव वीराने में तब्दील हो चुका है। उत्तराखंड के चम्पावत में बसे इस गांव में घर तो हैं, लेकिन इंसान एक भी नहीं। इंसान यहां जाना भी नहीं चाहता। कहते हैं वर्ष 1952 में हुए एक एक्‍सीडेंट के बाद यहां सब कुछ बदल गया।

इस गांव को अब भूतिया गांव के तौर पर जानते हैं
उत्‍तराखंड जिसे देवभूमि कहते हैं और यहां आपको ऐसी कई कहानियां आपको मिल जाएंगी, जिन्‍हें सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। इसी उत्‍तराखंड में आपको एक गांव ऐसा है, जहां पर इंसान नहीं बल्कि भूत रहते हैं। किसी समय में इस गांव में चहल-पहल रहती थी, लेकिन अब यहां डरावना सन्‍नाटा है। ऐसी चर्चा है कि इस गांव में आठ भूत हैं और अब इस गांव को भूतियां गांव के तौर पर जाना जाता है। कहते हैं कि इस गांव के भूत गांव में किसी भी इंसान को बसने नहीं देते।

63 साल पहले उस हादसे ने बदली गांव की तकदीर
उत्तराखंड में चंपावत जिले में एक गांव है स्वाला और यहां पर कोई भूलकर भी कदम नहीं रखना चाहता। इस गांव में कभी इंसानों की चहल-पहल रहती थी। कभी आबादी से भरे इस गांव का आलम आज यह है कि यह वीरान पड़ा है। भूतों के खौफ से अब इस गांव का नाम बदलकर ‘भूत गांव’ हो गया है। ऐसी कहानी है कि 63 साल पहले आठवीं बटालियन की पीएसी की एक गाड़ी के गिरने बाद वीरान हो गया था। इस गांव के कोसो दूर तक कोई इंसानी गांव नहीं है। यहां की जमीन ऐसी है कि यहां से गुजरने वाले को इनके मंदिर में रुक कर आगे जाना होता है।

दर्द से चीख रहे थे जवान और उन्हें लूट रहे थे गांव वाले
बताया जाता हैं कि वर्ष 1952 में हुए एक एक्‍सीडेंट के बाद गांव में सब कुछ बदल गया। दरअसल, एक बार यहां से सेना के जवानों की गाड़ी गुजर रही थी। तभी जवानों की गाड़ी खाई में गिर गई। गाड़ी में सेना के 8 जवान थे। कहा जाता है कि जवानों ने गांव वालों से मदद की अपील की। घायल जवान दर्द से कराह और चीख रहे थे, लेकिन गांव वालों ने उनकी चीख को नजरअंदाज कर दिया। गांववाले उन्हें बचाने की जगह उनके सामान को लूटने में लगे रहे। किसी ने भी आगे बढ़कर उनकी मदद नहीं की। कहते हैं कि गांव वालों ने अगर उनकी मदद की होती तो शायद कुछ जवान उनमें से जिंदा बच जाते और गांव भूतों का डेरा नहीं बनता।

अब स्वाला कोई नहीं जानता, गांव का नाम पड़ा भूतिया गांव
यहीं से गांव के वीरान होने की कहानी शुरू हो गई है। आस-पास रहने वाले लोगों का मानना है कि उस हादसे के बाद से ही यहां पर 8 जवानों की आत्माओं ने स्वाला गांव को अपना ठिकाना बना लिया। उन्होंने गांव वालों को परेशान करना शुरू कर दिया। जिसका नतीजा यह हुआ कि गांव वालों को अपना गांव छोड़ना पड़ा। तब से लेकर गांव अब तक वीरान है। डर के चलते स्वाला गांव के लोग इसे छोड़कर चले गए हैं। आसपास के लोग अब इसे भुतहा गांव के नाम से जानने लगे हैं। जिस जगह से पीएसी के जवानों का गाड़ी गिरी थी, वहां इन जवानों की आत्म शांति के लिए दुर्गा देवी का मंदिर स्थापित कर दिया, जहां हर आने और जाने वाली गाड़ी जरूर रुकती है।

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