– खनन माफियाओं की मनमानी से टनकपुर-जौलजीवी मोटर मार्ग शुरु होने से जाम

चम्पावत, डीडीसी। जब नियमों का उलंघन होता है तो खामियाजा किसी न किसी को और किसी न किसी रूप में भोगना ही पड़ता है। निर्माणाधीन टनकपुर-जौलजीवी मोटर मार्ग पर तो नियमों का चीर हरण हो रहा है और खामियाजा भुगत रही है जनता और सडक़ बनाने वाली कंपनी आरजीबीएल। खामियाजे में इंसानी जान और बेजुबान दोनों हलाक हो रहे हैं। शनिवार रात भी एक बेजुबान अवैध खनन में लिप्त डंपर के पहियों तले रौंद दिया गया। आए दिन घंटों का जाम बवाले जान बन चुका है। इन दुश्वारियों की वजह सीधे तौर पर कोई है तो वो है प्रशासन। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि नव निर्माणाधीन सडक़ का काम जब तक पूरा नहीं हो जाता, तब तक सडक़ को पूर्ण रूप से बंद रखा जाता है। ताकि जनहानि न हो और काम समय पर पूरा। हालांकि ये अब चम्पावत में मायने नहीं रखता।

साहब पहले पहचान करेंगे, फिर काम करेंगे
सडक़ बनाने वाली आरजीबीएल कंपनी लंबे समय से कोशिश कर रही है कि काम समय से खत्म किया जाए, लेकिन अब कंपनी को भी ये मुमकिन नहीं लगता। वजह सिर्फ वो नियम हैं, जिनका उलंघन हो रहा है। इनमें से एक खास वजह खनन है। रात दिन होने वाला खनन और खनन वाहन की वजह से जाम लगता है और निर्माण काम ठप हो जाता है। खनन विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है और वह अवैध खनन मेंं लिप्त स्थानीय लोगों की पहचान में जुटा है। ये पहचान कब पूरी होगी इसका तो पता नहीं है। हालांकि खनन विभाग ये मान चुका है कि अवैध खनन हो रहा है।

अफसर क्या बोलें, खनन की सेटिंग तगड़ी है
उत्तराखंड में कम समय में रुपया कमाने का सबसे बड़ा ठिकाना उत्तराखंड की नदियां हैं। जहां से एक नंबर का रेता निकलता है और महंगे दामों पर बिकता है। समझ लीजिए अगर आपने एक बार पैर जमा लिए तो मालामाल हो जाएंगे। यही वजह है कि इस धंधे में जड़ जमाने के लिए ऊपर तक सेटिंग और जेब में दम होनी चाहिए। अब जिसके हाथ में ये दोनों चीजें हैं तो उसके लिए कुबेर का कोष खुल जाता है। होता ये है कि सेटिंग का रौब दिखा कर काम होता है और रुपयों से सारा मामला रफा-दफा कर दिया जाता है। इस धंधे की एक खास बात ये भी है कि ये हर किसी के बस की बात भी नहीं है।

…और असहाय आरजीबीएल
इस सडक़ पर तीन स्थानों पर ब्रिज का काम चल रहा है। यानी दो पहाडिय़ों को जोडऩे काम चल रहा है। ये काम भवानी नाला में 90 मीटर स्टील ब्रिज, लादीघाट और गौजीनाला में 24-24 मीटर के दो ब्रिज बनने हैं। इनमें से एक में तो दो पहाड़ों के बीच की खाली जगह को भरने का काम चल रहा है। भरान अभी इतना संकरा है कि बमुश्किल एक ही वाहन निकल सके और वो भी सांस रोक कर। ऐसे में जब एक समय में एक बार का ही यातायात इससे गुजारा जाता है। तब तक काम निर्माण काम थमा रहता है। एक तरफ के वाहन गुजरते ही दूसरी तरफ के लोग यात्रा शुरू कर देते हैं। ऐसे में जान को जोखिम भी रहता है और सोचिए कि निर्माणा का काम दिन में कितने घंटे हो पाता होगा।

29 मार्च को पूरा होना है काम, लेकिन हो नहीं पाएगा
पिछले केवल 15 दिनों में लाखों का घाटा उठा चुकी आरजीबीएल कंपनी को सडक़ का काम हर हाल में 29 मार्च 2021 को पूरा करना है, लेकिन ऐसा हो नहीं पाएगा। टनकपुर-जौलजीवी सडक़ का काम वर्ष 2017 में शुरु हुआ था। नियमों के मुताबिक निर्माणाधीन सडक़ का इस्तेमाल केवल और केवल स्थानीय लोग और आर्मी कर सकती है। इसके अलावा सडक़ इस्तेमाल की इजाजत किसी को तब तक नहीं दी जाती, जब तक सडक़ और दस्तावेजों का विभागीय काम पूरा नहीं हो जाता। इस नियम को मानने के अलावा स्थानीय प्रशासन हर काम कर रहा है।

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