– उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद पुलिस कांस्टेबल पद पर भर्ती उत्तराखंडी पुलिस कांस्टेबल के पद ही हो गए सेवानिवृत्त

सर्वेश तिवारी, हल्द्वानी। उत्तराखंड 21 साल का हो गया है। कभी जो बच्चे थे, वो अब बाप बन गए हैं, लेकिन उत्तराखंड के कांस्टेबल पद पर भर्ती हुए लोग कांस्टेबल के पद से ही रिटायर हो रहे हैं। जबकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में इन्हीं लोगों के बैच के सिपाही आज कंधे पर दो स्टार लगा कर घूम रहे हैं और सिपाही सलाम ठोंक रहे हैं। ये एक तरह की मानसिक प्रताड़ना है, जो उत्तराखंड के सिपाहियों को झेलनी पड़ रही है।

पुलिस कांस्टेबल का मनोबल गिर रहा है और इसकी वजह ये है कि वह खुल कर कुछ कह नहीं पा रहे। आलम यह है कि वर्ष 1989 बैच के कांस्टेबल को ही पदोन्नति मिली और हेड कांस्टेबल बन गए। इस बात को भी 30 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है। इसके इतर अगर उत्तर प्रदेश के पुलिस कांस्टेबल की बात करें तो 1990 बैच के पुलिस कांस्टेबल आज पद्दोन्नत होकर दरोगा बन चुके हैं।

इनके कंधों पर दो स्टार लग चुके हैं। जबकि 2011 बैच वाले कांस्टेबल पदोन्नत होकर हेड कांस्टेबल बन चुके हैं। केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस में भी कांस्टेबल को अच्छी पदोन्नति मिली है। राजस्थान में 2010-12 बैच वाले पुलिस कांस्टेबल के कंधे पर अब दो स्टार हैं और उत्तराखंड में कांस्टेबल आज भी कांस्टेबल है।

और साहब के कंधों पर सजते जा रहे स्टार
एक ही महकमे में दो नियम चल रहे हैं। एक कांस्टेबल जो उम्मीद पाले बैठा है और शायद एक दिन पदोन्नति की इसी उम्मीद साथ सेवानिवृत्त भी जाएगा, लेकिन पुलिस के साहब के लिए इसी विभाग के नियम बिल्कुल इतर हैं। उत्तराखंड में ऐसे तमाम साहब हैं जो सीओ थे और इसी 21 साल में सीओ साहब ने एसएसपी साहब तक का सफर तय कर लिया है। केवल सीओ ही नहीं बल्कि एसआई पद पर भर्ती हुए लोगों को भी अच्छी पदोन्नति मिली, लेकिन कांस्टेबल को नहीं।

20 साल बाद पूरी हुई एपी पुलिस की मुराद
उत्तराखंड के एपी पुलिस का हाल सिविल पुलिस से जरा अलग है। हालांकि इन्होंने भी पदोन्नति न होने पर बहुत मानसिक यातना झेली है। यहां 2001 बैच के एपी पुलिस कांस्टेबल को 20 साल बाद पदोन्नति मिली और वो हेड कांस्टेबल हो गए। इसके लिए भी एपी पुलिस को बहुत जद्दोजहद करनी पड़ी। जबकि सिविल पुलिस के कांस्टेबल के साथ ऐसा नहीं हुआ। हालांकि फिर भी सिविल पुलिस को यह उम्मीद है कि एक दिन उनके कंधों पर स्टार सजेंगे, लेकिन ये कब होगा उन्हें भी नहीं पता।

चिढ़ाते हैं उत्तर प्रदेश वाले पुलिस दोस्त
पदोन्नति को लेकर एक कांस्टेबल ने बताया कि वह राज्य गठन से पहले ही पुलिस में भर्ती हो गया था। उसके बैच के तमाम साथी आज उत्तर प्रदेश पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनका रुतबा बढ़ चुका है। ये कांस्टेबल अब दरोगा बन चुके हैं और तमाम स्थानों पर चौकियों के प्रभारी हैं। साथ भर्ती हुए इन दोस्तों से बात होती है तो उत्तराखंड के कांस्टेबल को शर्मिंदगी महसूस होती है। वो जब पूछते हैं कि भाई तू आज भी कांस्टेबल है तो वह कुछ कह नहीं पाते।

वायरल है विधायक प्रीतम का पत्र
विधायक प्रीतम सिंह पंवार का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये पत्र गृह मंत्री को संबोधित करते हुए लिखा गया और इस पत्र में उत्तराखंड कांस्टेबल की पदोन्नति से जुड़े तमाम चोटीले सवाल हैं। पूछा है कि आखिर क्यों कांस्टेबल की पदोन्नति नहीं हो रही है। अमृत विचार इस वायरल पत्र की पुष्टि नहीं करता, लेकिन गृह मंत्री से पूछे गए सवाल बिल्कुल वाजिब हैं। इस पत्र के अंत में एक हस्ताक्षर और विधायक प्रीतम सिंह पंवार की मुहर भी लगी है, जो 20 मई 2022 को लिखा गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here