– तीरथ कैबिनेट की पहली बैठक में नए गठित प्राधिकरण स्थगित

देहरादून, डीडीसी। शुक्रवार शाम तीरथ कैबिनेट की पहली बैठक हुई और पहली ही बैठक में बड़ा फैसला लिया गया। पहली ही बैठक में तीरथ रावत सरकार ने त्रिवेंद्र के लिए कई फैसलों को पलट दिया। साथ ही फैसला लिया है कि कोरोना काल के दौरान लोगों पर आपदा प्रबंधन एक्ट और महामारी एक्ट के तहत दर्ज सभी मुकदमें वापस लिए जाएंगे। इसके अलावा कैबिनेट ने कुछ और अहम फैसले लिए हैं। बैठक शुक्रवार शाम को मंत्रीमंडल गठन के तत्काल बाद बीजापुर गेस्ट हाउस में हुई।

लॉकडाउन में दर्ज किए गए 4800 मुकदमें
तीरथ सरकार ने लॉकडाउन की अवधि में आपदा प्रबंधन एक्ट और महामारी एक्ट के तहत दर्ज सभी मुकदमें वापस लेने का निर्णय लिया है। इन मुकदमों की संख्या करीब 4800 है। मुख्य सचिव ने बताया कि इस दौरान प्रवासियों सहित कई लोगों पर लॉकडाउन उल्लंघन के मुकदमें दर्ज हुए थे। उन्होंने बताया कि इस बीच कुछ लोगों के मुकदमें वापस भी हो रहे थे, लेकिन अब सरकार ने एक सामान्य निर्णय लेते हुए ऐसे सभी मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इसमें राजनैतिक गतिविधियों के चलते इन दोनों धाराओं में दर्ज मुकदमें शामिल होंगे।

नए गठित जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण स्थगित
तीरथ कैबिनेट की पहली बैठक में नए गठित जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को स्थगित कर दिया गया है। इन प्राधिकरणों में तत्काल प्रभाव से नक्शा पास कराने पर रोक लगाते हुए, पूर्व की स्थिति बहाल कर दी गई है। त्रिवेंद्र सरकार के समय ही 2017 में नौ नए जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों का गठन हुआ था।

प्राधिकरणों में पुरानी स्थिति बहाल
मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने बताया कि विकास प्राधिकरणों पर 2016 की स्थिति बहाल कर दी गई है। इसके साथ ही नए गठित विकास प्राधिकरणों में नक्शा पास करने पर रोक लगा दी गई है। 2016 से पहले के गठित विकास प्राधिकरण पहले की तरह काम करते रहेंगे। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की समीक्षा के लिए कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत की अध्यक्षता में उप समिति का गठन किया गया है। जिसमें कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय और सुबोध उनियाल को शामिल किया गया है।

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