– घूस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, इसीलिए तो नही गई कुर्सी

देहरादून, डीडीसी। मुख्यमंत्री बनने के कुछ माह बाद से ही त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाए जाने को चर्चा शुरू हो गई थी। अब कुर्सी चली है और चर्चा अब त्रिवेंद्र पर लगे आरोपो की हो रही है। ऐसा ही एक आरोप घूस लेने का है और घूस की रकम त्रिवेंद्र ने अपनी साली के खाते में जमा कराए। इस पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। ऐसे में तुक्का लगाया जा रहा है कि कहीं कुर्सी जाने की एक वजह ये आरोप तो नही।

गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनवाने के एवज में ली घूस
ये मामला तब का है, जब त्रिवेंद्र उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नही थे। बात वर्ष 2016 की है। तब झारखंड में भाजपा की सरकार थी और त्रिवेंद्र झारखंड में प्रभारी की भूमिका में थे। वर्ष 2016 में ही उन आरोप लगा कि उन्होंने गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनवाने के एवज में एक व्यक्ति से घूस ली और घूस की रकम को त्रिवेंद्र ने अपनी साली के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए। आपको बता दें कि ये नोटबन्दी का दौर था और ये सारे आरोप एक पत्रकार ने लगाए थे।

फिर दून में पत्रकार पर लिखे ताबड़तोड़ मुकदमे
त्रिवेंद्र सिंह रावत पर घूस का आरोप लगा और आरोप लगाने वाले पत्रकार पर आफत आ गई। देहरादून में पत्रकार के खिलाफ ताबड़तोड़ मुकदमे दर्ज करा दिए गए। इन मुकदमों को रद्द करने के लिए पत्रकार ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी और याचिका त्रिवेंद्र के गले की फांस बन गई। इस मामले में हाईकोर्ट ने त्रिवेंद्र के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। माना जा रहा है कि यही वजह है कि त्रिवेंद्र को राज्य में अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार
पत्रकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने त्रिवेन्द्र सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। उन्होंने कहा था कि इस मामले में हाईकोर्ट ने बगैर उनका पक्ष जाने सीबीआई जांच के आदेश दे दिए। अब आज यानी 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

फजीहत के डर से तो नही गई कुर्सी
किसने सोचा थी कि प्रचंड बहुमत वाली सरकार पर सवार त्रिवेन्द्र सिंह रावत सफर के अंतिम पड़ाव पर पैदल हो जाएंगे। फिलहाल इसके पीछे विधायकों, पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष और जनता के बीच घटती लोकप्रियता को वजह माना जा रहा है। वजह तो भ्रष्टाचार को भी माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर त्रिवेंद्र के सीएम पद पर रहते सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर उनके खिलाफ आ जाता तो इससे फजीहत बहुत होती। लिहाजा इससे पहले ही सीएम को बदलने का फैसला ले लिया गया।

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