– गाय का दूध पीकर उन्हें जंगल में मरने के लिए छोड़ने वालों को आनी चाहिए शर्म

हल्द्वानी, डीडीसी। जब तक दूध देती हैं या दूध न देने वाली बछिया जैसे कोई कमी नजर आई तो गाय की बछिया छोड़ दी गयी जंगल में गाय गौ माता थी दूध पीने वाले देहरी धोने वाले तो गाय इन्हीं लोगों को चारपाई पर पड़े बूढ़े मां-बाप जैसे लगने लगे। ऐसी गायों को अब लोग जंगल में जंगली जानवरों का निवाला बनने के लिए छोड़ रहे हैं। ऐसी ही एक गाय पर जब पहाड़ की बेटी मंजू भट्ट की निगाह पड़ी तो दिल पसीज गया। तय किया कि इसे मरने के लिए जंगल में नहीं छोड़ेंगे। इस काम के लिए दिक्कत पैसों की थी, जो फिलहाल गौ प्रेमियों के रहते आड़े नहीं आई। गौ प्रेमियों के साथ मंजू गुरुवार को जंगल पहुंची और गाय का रेस्क्यू कर उसे उसके अपनों के बीच यानी गौशाला पहुंचाया।

बुधवार को जंगल में गाय को देखा था अकेला
मंजू भट्ट समाजसेवी स्यूड़ा हैड़ाखान नैनीताल की रहने वाली हैं। बुधवार को वह हल्द्वानी से अपने घर जा रहीं थीं। तभी उनकी निगाह काठगोदाम थाने से तकरीबन चार किलो मीटर दूर हैड़ाखान रोड पर जंगल में देखा। उस वक्त लगा कि कोई गाय को चराने आया होगा, लेकिन अगले दिन लौटते वक्त भी जब गाय उसी स्थान पर खड़ी मिली तो मामला समझते उन्हें देर नहीं लगी।

आदि श्री धाम ट्रस्ट दीपक जोशी अधिवक्ता व उनके साथियों संग किया रेस्क्यू
घायल और लाविरस गो वंशियों के लिए दिन-रात काम करने वाले आदि श्री धाम ट्रस्ट से मंजू जुड़ी हुईं हैं। जब बुधवार के बाद गुरुवार को भी उन्होंने गाय को वहीं देखा तो इसकी जानकारी उन्होंने ट्रस्ट के दीपक जोशी को दी। इंतजाम किया गया रेस्क्यू के लिए वाहन का दीपक जोशी,सन्नी, गितांशु, इंदु, निकिता ,छोटा हाथी चालक धर्मेंद्र और मंजू ने मिलकर गाय का रेस्क्यू कर लिया।

लावारिस छोड़ने के लिए काटे जाते हैं कान
गणना के लिए गौ वंशियों के साथ भैंसों को सरकार ने टैग लगाने का अभियान शुरू किया। टैग इनके कानों में लगाया जाता है और टैग से यह पता लगाया जा सकता है कि उक्त जानवर किसका है। गौ प्रेमी दीपक जोशी की मानें तो जब लोगों को अपनी गाय से मुक्ति चाहिए होती है तो वह टैग के साथ गायों का कान काट देते हैं। ताकि पता ही न लगे कि गाय किसकी है। ऐसे में कई दफा गाय के कान तक सड़ जाते हैं।

 

हर जानवर के लिए आगे आता है ट्रस्ट : दीपक
दीपक जोशी ने बताया कि हमारा लक्ष्य हर घायल जानवर को उचित उपचार मुहैया कराना है। फिर वह दूध देने वाला जानवर हो या कोई और। बीते मुनासिब नहीं समझ रहे थे।

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