– एक वक्त था जब सुमित पर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल के सुर से सुर मिला रहे थे हरीश रावत

सर्वेश तिवारी, डीडीसी। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से ऐन पहले कांग्रेसी दावेदारों के बीच हल्द्वानी विधानसभा जंग कर मैदान में तब्दील हो चुकी है। अब इस जंग में हरीश रावत के एक बयान ने दावेदारों को अपनी तलवारों में धार और तेज करने पर मजबूर कर दिया है। खास तौर पर हरीश रावत के बयान के बाद सुमित ह्रदयेश के लिए टिकट की ये जंग फतह करना आसान नही है। हालांकि सुमित को ही हल्द्वानी सीट पर दावेदार माना जा रहा था, लेकिन हर पल नई चाल चलने वाली राजनीतिक बिसात पर ये बात अब पुरानी हो गई है और सुमित के सामने कई मजबूत दावेदार हैं। जिनमें टिकट की जंग जीतने का माद्दा है।

सुमित को उत्तराधिकारी तो माना, लेकिन टिकट पर…?
हल्द्वानी पहुंचे हरीश रावत ने एक सवाल के जवाब में यह तो स्वीकार कर लिया कि सुमित ही इंदिरा हृदयेश के उत्तराधिकारी है, लेकिन इसका मतलब ये नही कि टिकट भी सुमित को ही मिलेगा। उन्होंने कहाकि मैंने कहा था सुमित इंदिरा जी के काम को आगे बढ़ाएंगे, तो काम को आगे बढाने का अर्थ चुनाव से नही होता है। इसका अर्थ होता है जो इंदिरा के सामाजिक जीवन के कर्तव्य थे उन कर्तव्यों को बेटा-बेटी तो आगे बढाते हैं और जब वो कर्तव्यों को आगे बढाते है तो जनता आशीर्वाद देती है। बहुत सारे निर्णय हमारे हाथ में नही होते, वो जनता के हाथ मे होते हैं।

पार्टी और इंदिरा के लिए ललित ने दो बार समझौता किया
राज्य आंदोलनकारी और पुराने कांग्रेसी और इंदिरा हृदयेश की राजनीतिक करियर में अहम किरदार निभाने वाले ललित जोशी को दो बार टिकट से हाथ धोना पड़ा। या यूं कह लें कि उन्होंने इंदिरा और कांग्रेस के लिए अपने करियर से कम्प्रोमाइज कर लिया, लेकिन अब इंदिरा हृदयेश नहीं और ललित को टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। पैर जख्मी होने के बावजूद वो जनता के बीच मेहनत कर रहे हैं। ललित और सुमित के बीच एक तीसरा नाम दीपक बल्यूटिया का है।

सिम्पैथी वोट तो है, लेकिन सेंधमारी का क्या
अपने बयान में हरीश रावत ने एक बात तो साफ कर दी है और वो ये की 2022 के विधानसभा चुनाव के वक्त जीतने वाले को ही देखा जाएगा। अब इंदिरा की मृत्यु से सुमित को मिलने वाला सिम्पैथी वोट चुनाव में फायदा तो करेगा, लेकिन सेंधमारी न हो तो और इसकी प्रबल संभावनाएं हैं। बनभूलपुरा, इंदिरा नगर और राजपुरा बेल्ट के बूते इंदिरा ने हमेशा जीत दर्ज की और यहीं से सिम्पैथी वोट मिलेंगे। इस सिम्पैथी वोट में बहुत बड़ा हिस्सा मुस्लिम वोट बैंक का है और दिक्कत ये कि इस दफा दो-दो मुस्लिम कैंडिडेट चुनाव में उतर सकते हैं, जो सुमित के लिए मुश्किल वाली बात है।

बदल गए कुंजवाल के बयान पर हरदा के हां के मायने
कांग्रेस वरिष्ठ नेता और हरीश रावत के बेहद करीबी गोविंद सिंह कुंजवाल ने सुमित हृदयेश को ही इंदिरा का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना था। पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी तब कुंजवाल के सुर से सुर मिलाए थे लेकिन अब हरीश रावत ने अपनी बात साफ की है और तब कुंजवाल की हां में हां मिलाने के मायने अब बदल चुके हैं। हरीश रावत ने कहा ‘मेरे से जब पूछा गया कि इंदिरा जी के कामों को कौन आगे बढ़ाएगा, तो मैंने कहा कि उनके बेटे सुमित काम करते हैं तो वे उनके काम आगे बढ़ाएंगे। रावत के मुताबिक, काम आगे बढ़ाने का अर्थ चुनाव से नहीं होता।

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