– हरिद्वार देहरादून रूट पर टोल शुरू होने की वजह से बढ़ाया गया किराया

हल्द्वानी, डीडीसी। लगातार बढ़ती महंगाई के बीच उत्तराखंड की जनता के लिए एक और बुरी खबर है और खबर ये है कि अब अगर आपको देहरादून रूट पर सफर करना है तो जेब का वजन पहले से हल्का करना होगा। रोडवेज ने इस रूट पर दस रुपये किराया बढ़ा दिया है और इस बढ़े किराये के साथ ही परिचालक को अच्छी खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किराया बढ़ते ही टिकट मशीनों को अपग्रेड किया गया और इसी के साथ मशीनों ने जवाब देना शुरू कर दिया। इसके बारे में आपको बाद में बताएंगे, इससे पहले आपको बढ़े हुए किराये का पूरा गणित समझा देते हैं।

केवल हरिद्वार-देहरादून रूट पर बढ़ा है किराया
उत्तराखंड परिवहन निगम ने केवल हरिद्वार-देहरादून रूट पर ही किराया बढ़ाने का निर्णय लिया है। किराये में कुल 10 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई है। अब अगर आपको हल्द्वानी या नैनीताल से सीधे देहरादून जाना है तो कुल किराये में 10 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। मान लीजिए कि आपको नैनीताल से केवल हरिद्वार तक जाना है तो आपसे पुराना किराया ही लिया जाएगा। बढ़ा किराया केवल और केवल हरिद्वार से देहरादून पर तय किया गया है और इसकी वजह है हरिद्वार और देहरादून के बीच शुरू हुआ नया टोल प्लाजा।

खामखां मुजहमत झेलनी पड़ी परिचालकों को
इस पूरी व्यवस्था का खामियाजा केवल और केवल परिचालकों को झेलना पड़ा। हुआ ये कि बढ़े हुए किराये के साथ टिकट मशीनों को भी बढ़े हुए किराये के तहत अपग्रेड किया गया। मशीनों का ये अपग्रेड पूरे प्रदेश में हुआ, लेकिन तकनीकि खामी की वजह से मशीनें ठीक ढंग से अपग्रेड नहीं हो पाईं। फिर हुआ ये कि परिचालक किराये के रूप टिकट मशीन में सही किराया दर्ज कर रहा था, लेकिन जो टिकट मशीन से बाहर निकल रहा था, वह गले की फांस बन गया। मशीन कुल किराये में कभी 10 तो कभी 100 और कभी-कभी तो हजार-हजार रुपये अतिरिक्त जोड़ दे रही थी।

लेट हुईं बसें और सवारियों से मचमच अलग
एक मशीन को अपग्रेड करने में कम से कम 20 मिनट का वक्त लगता है और आज से ही हरिद्वार-देहरादून रूट पर किराया बढ़ाया गया। इसी के साथ मशीनों को आनन-फानन में अपग्रेड किया जाने लगा। अचानक बनी इस व्यवस्था से खासी दिक्कतें हुईं। मशीनों ने अपग्रेड होने में वक्त लिया और इसी की वजह से बसें डिपो से देर में रवाना हो सकीं। जिसके चलते यात्री परेशान हुए और उनकी चालक-परिचालकों से जमकर नोकझोंक हुई। हालांकि बाद में परिचालकों को मशीन और कागजी टिकट के साथ रवाना किया गया। ताकि यदि मशीन दिक्कत करे तो मैनुअल टिकट बनाया जा सके।

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