– उत्तराखंड STF ने किया खुलासा, एक सलाखों के पीछे

देहरादून, डीडीसी। दुनिया भर की पुलिस के लिए चुनौती बन चुका साइबर क्राइम के मामले में उत्तराखंड में एसटीएफ के हाथ एक बड़ी मछली लगी है। एसटीएफ ने छोटी मोटी नही बल्कि शायद भारत की सबसे बड़ी ठगी का खुलासा किया है। ठगी में लाख दो लाख की नही बल्कि 250 करोड़ की। इस खुलासे ने देश की शीर्ष जांच एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं। साइबर ठग के एक ऐसा गिरोह सामने आया है जो 15 दिन में पैसा दोगुना करने का लालच देता था और इस काम को अंजाम दिया जाता था गूगल प्ले पर मौजूद एक एप के जरिये। इस ऐप को देशभर में करीब 50 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था।

क्रिप्टो करंसी में बदल कर विदेश भेजी जा रही थी ठगी की रकम
मामले में एक मुख्य आरोपी पवन पांडेय नोएडा से गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से 19 लैपटॉप, 542 सिम कार्ड, 5 मोबाइल फोन, 4 एटीएम और एक पासपोर्ट बरामद हुआ है। एसटीएफ की जांच में पता चला है कि यह धनराशि क्रिप्टो करेंसी में बदल कर विदेशों में भेजी जा रही थी। साइबर अपराधी ने पावर बैंक नाम की एक ऐप के माध्यम से पैसे इन्वेस्ट करने पर 15 दिन में दोगुना करने का लालच आम जनता को दिया था। आम जनता से ही करोड़ों की धनराशि कमा कर वह इस धोखाधड़ी को अंजाम दे चुके थे।

रोहित ने जमा कराए 1 लाख 64 हजार रुपये
हरिद्वार के श्यामपुर के रहने वाले रोहित कुमार ने साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें उसने बताया कि उसके दोस्त ने उसे पावर बैंक एप की जानकारी दी है। इसमें पैसे इन्वेस्ट करने पर 15 दिन में पैसे दोगुने आते हैं। इसके बाद रोहित कुमार द्वारा भी पावर बैंक एप डाउनलोड की गई और अलग-अलग तिथियों में 91200 और 73000 रुपये जमा कराए गए। जब ठगे जाने का एहसास हुआ तो रोहित पुलिस के पास पहुंचा।

ठगी का तरीका देख हक्के बक्के रह गए अफसर
रोहित की शिकातय के बाद पुलिस को भी एक बड़े साइबर क्राइम रैकेट का अंदेशा हुआ। इसके बाद पुलिस लगातार छानबीन में जुटी रही साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा सभी खातों की टेक्निकल जांच की गई तो पेटीएम बैंक का खाता ही प्रमुख संदिग्ध खाता लगा। इसका संचालन पवन कुमार पांडेय के द्वारा किया जा रहा था जो कि नोएडा में रह रहा था। जब पूरी जांच की गई तो सभी के हाथ पांव फूल गए। क्योंकि अलग-अलग खातों से करीब ढाई सौ करोड रुपए की धनराशि की धोखाधड़ी की बात सामने आई। यह बात भी सामने आई कि कुछ विदेशी बिजनेसमैन भारत में कुछ निवेशकों से दोस्ती करते हैं और उसके बाद अलग अलग व्यापार के नाम पर कमीशन देने के नाम पर उन्हें जोड़ते हैं।

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