– रामनगर डिपो की बस में यात्री असली और टिकट नकली

हल्द्वानी, डीडीसी। सालों हो गए, घाटे से नहीं उबर पाई उत्तराखंड रोडवेज में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। यहां रामनगर डिपो की सवारियों से खचाखच भरी बस जांच टीम के हत्थे चढ़ी। यात्रियों से भरी इस बस में टिकट सबके पास था, लेकिन फर्जी और इस फर्जी टिकट का पैसा चालक-परिचालक की जेब में। अब चालक-परिचालक सस्पेंड कर दिए गए हैं और पता लगाया जा रहा है कि आखिर ये खेल कब से चल रहा था।

कमाई वाले रुट पर चलती है बस
रामनगर डिपो की साधारण बस (यूके07पीए-4265) दिल्ली-रामनगर मार्ग पर चलती है। इस बस की पिछले कई दिनों से शिकायत मिल रही थी कि बस बेटिकट चल रही। इस वजह से बस की आय डिपो में जमा नहीं हो रही थी। जिस पर नैनीताल मंडल प्रबंधक ने सोमवार रात गोपनीय ढंग से अपनी प्रवर्तन टीम भेजकर बस की जांच कराई। टीम ने दिल्ली से आते हुए बस को गढ़ क्षेत्र में रोकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने बस दौड़ा दी। इसके बाद टीम ने पीछा किया और बस को जोया टोल प्लाजा पर पकड़ लिया।

अखबार की गाड़ी से किया पीछा
बताया जाता है कि चेकिंग कर रही बस को रात टीम ने रुकने का इशारा किया, लेकिन जैसे ही चालक को लगा कि ये जांच टीम है तो उसने बस रोकने के बजाय दौड़ा दी। जिसके बाद पैदल जांच टीम के लिए उसे पकड़ना मुश्किल हो गया। इसीबीच दिल्ली की ओर से आ रही एक अखबार की गाड़ी को टीम ने रुकवाया। जिसे 5 सौ रुपये देने पर वह पीछा करने के लिए राजी हो गया। टोल टैक्स से करीब एक किलो मीटर पहले बस को रोक लिया गया। बावजूद इसके चालक-परिचालक ने बस का दरवाजा नही खोला। करीब आधा घंटा जदोजहद के बाद जब दरवाजा खुला तो सारी की सारी पोल भी खुल गई।

कई दिनों से नही आ रहा था किराया
बस में कुल 35 यात्री बैठे हुए थे। सभी के पास टिकट तो थे, लेकिन वो टिकट नकली थे। प्रवर्तन टीम की ओर से बस परिचालक गौरव रघुवंशी और चालक अरविंद कुमार के खिलाफ नैनीताल मंडल प्रबंधक व मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई। महाप्रबंधक (संचालन) दीपक जैन ने बताया कि चालक-परिचालक विशेष श्रेणी के हैं, जिन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।

एजीएम की भूमिका की होगी जांच
पूरी बस बिना टिकट दौड़ने से रामनगर के प्रभारी डिपो एजीएम की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही। इस बस के बेटिकट दौड़ाने की लगातार शिकायत मिल रही थी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये था कि रोजाना बस चलने के बावजूद एक सवारी भी नही मिल रही। इन हालातों में आखिर एजीएम की ओर से जांच क्यों नहीं की गई। इसके साथ ही रोडवेज के नियमानुसार दस और इससे अधिक बेटिकट पर एजीएम के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रविधान है।

भ्रष्टाचार के लिए खुद रोडवेज दोषी
रोडवेज में भ्रष्टाचार बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह रोजवेज ही है। क्योंकि रोडवेज ही अपने कर्मचारियों को भ्रष्टाचार का मौका दे रहा। दरअसल लंबे समय से टिकट काटने वाली मशीनें खराब पड़ी हैं। बताया जाता है कि पूरे राज्य में तकरीबन आधी मशीनें खराब हैं। ऐसे में पुरानी व्यवस्था के तहत यानी मैन्युअली टिकट काटे जा रहे हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार बढ़ना स्वाभाविक है। जबकि भ्र्ष्टाचार को खत्म करने के लिए ही रोडवेज में टिकट मशीनों को लाया गया था। मौजूदा वक्त में रोडवेज 700 बसों का संचालन कर रहा है। इनमें करीब 300 बसों पर टिकट मशीन नहीं है।

खत्म हो गई मशीनों की वारंटी
मशीने न होने की वजह से परिचालकों को कागजी टिकट देकर भेजा जा रहा है। ये सब इसलिए है कि पूर्व में जो टिकट मशीनें खरीदी गई थीं उसमें से आधी से अधिक मशीनें खराब हो हैं। इन मशीनों की वारंटी भी दो साल पूर्व समाप्त होने की वजह से कंपनी भी अब इन्हें ठीक भी नहीं कर रही। मशीन न होने का लाभ उठा परिचालक बेधड़क बिना टिकट यात्रा करा रहे।

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