– सरकारी दस्तावेजों में अभी भी जिंदा है विकास दुबे

भरत गुप्ता, (कानपुर) डीडीसी। दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की मौत को आज केवल एक हफ्ता कम है। आज ठीक एक साल हो चुका है। आज के एक हफ्ते बाद बिकरु कांड को अंजाम देने विकास दुबे का एनकाउंटर हुआ था, लेकिन क्या सच में उस एनकाउंटर में विकास दुबे मर गया था। आज अगर इस बात को कानूनी तौर पर साबित करना हो तो कोई साबित नही कर पाएगा कि विकास दुबे मर चुका है। क्योंकि सरकारी दस्तावेजों में आज भी विकास दुबे जिंदा है। आज उसकी मौत को एक साल गुजर चुके हैं, लेकिन विकास की मौत का दस्तावेज यानी डेथ सर्टिफिकेट आज तक जारी नही किया गया और इसकी वजह है सिस्टम की खामी।

2 जुलाई की रात मारे 8 पुलिसवाले, 1 हफ्ते बाद एनकांउटर
चौबेपुर थानाक्षेत्र के बिकरू गांव में 2 जुलाई की रात अपराध की दुनिया के बेताज बादशाह विकास दुबे ने आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की थी। इस वारदात ने सरकार हिला दी। वारदात के एक हफ्ते बाद विकास उज्जैन से गिरफ्तार किया गया और उसी रोज उसका एनकाउंटर हो गया। वो पुलिस हिरासत से भागने की फिराक में था। अब आइए बतांते हैं कि आखिर विकास जिंदा कैसे है।

भुखमरी की कगार पर विकास का परिवार
बिकरूकांड को पूरे एक साल हो गए हैं। इस बीच गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे अचानक एक साल बाद सामने आई। उसने जिला प्रशासन पर बड़ा आरोप लगाया और कहा कि पति की मौत के बाद उनका डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिला। जिसके चलते हमारे सामने भुखमरी की समस्या खड़ी हो गई है और ये सब प्रशासन की हीलाहवाली की वजह से हो रहा है।

दस्तावेज में बदल गया बाप का नाम
एनकाउंटर के बाद कानपुर में विकास दुबे का पोस्टमार्टम  कराया कराया।  पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विकास के पिता का नाम राम कुमार की जगह राज कुमार दर्ज हो गया था। जब श्मशान घाट में उसका अंतिम संसकार कराया गया तो श्मशान की पर्ची में भी वही नाम दर्ज किया गया, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज था। इस पर्ची के आधार पर ही नगर निगम में डेथ सर्टिफिकेट बनता है। नगर निगम ने जब रिकार्ड देखा तो पर्ची और रिकार्ड में नाम मैच नहीं किया।

मालिकाना हक तब मिलेगा जब सही डेथ सर्टिफिकेट बनेगा
डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिलने से रिचा दुबे को मालिकाना हक नहीं मिला। गांव में उसके सास-ससुर झोपड़ी में रहने को विवश हैं। पैसे खत्म हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई, दवाई और राशन के लिए नाते-रिश्तेदरों से पैसा लेना पड़ रहा है। यदि विकास का डेथ सर्टिफिकेट मिल जाए तो उसकी प्रॉपर्टी हमारे नाम हो जाएगी। रिचा ने बताया कि वो पिछले कई माह से नगर निगम, डीएम आफिस के चक्कर लगा रही हैं पर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे।

1847/20 है विकास की मौत का नम्बर
विकास दुबे के पिता का नाम पोस्टमार्टम की पर्ची में गलत होने से अंतिम संस्कार की पर्ची में भी गलत नाम चढ़ा। इस वजह से नगर निगम ने सर्टीफिकेट बनाने से मना कर दिया। श्मसान घाट से से ही नगर निगम डेथ सर्टिफीकेट जारी करता है। नगर निगम ने जब रिकॉर्ड देखा तो पर्ची और रिकॉर्ड में दर्ज नाम मैच नहीं किया। ऋचा दुबे ने इस खामी को ठीक कराने के लिए पोस्टमार्टम, नगर निगम सब जगह सम्पर्क किया, मगर कुछ नहीं हो सका। इस पर्ची का नंबर 1847/20 है।

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