– बोले, अमित की चेतावनी के बाद भी सोते रहे धामी

देहरादून, डीडीसी। विधानसभा चुनाव नजदीक और सियासतदानों को सियासत के लिए आपदा में अवसर प्राप्त हो गया है। फिर वो पक्ष हो या विपक्ष। बीती 18 अक्टूबर को उत्तराखंड में आई आपदा पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने जहां समय से जानकारी उपलब्ध कराने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ की, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को आड़े हाथों ले लिया। उन्होंने सोमवार को उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य ने सुरक्षा के लिहाज़ से बचाव के कारगर कदम नहीं उठाए। रावत ने कहा कि अलर्ट के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा राज्य सरकार से पूछा भी गया था कि भारी बारिश से जूझने के लिए किस तरह के प्रबंध किए जा रहे हैं और इसके बावजूद राज्य सरकार ने लापरवाही का रवैया दिखाया।

अमित की चेतावनी के बाद भी सोती रही धामी सरकार
हरीश रावत ने कहा ‘भारी बारिश से 36 घंटे पहले अलर्ट जारी किए जाने के बाद उत्तराखंड क्या सुरक्षात्मक कदम उठा रहा था, इस बारे में राज्य सरकार से पूछने के लिए अमित शाह का आभार व्यक्त करता हूं, लेकिन अमित शाह की चेतावनी के बावजूद उत्तराखंड में बारिश के कहर से 36 घंटे पहले तक राज्य सरकार सोती रही।’ यही नहीं, रावत ने पूर्ववर्ती बहुगुणा सरकार के समय की तुलना भी मौजूदा संकट के साथ की।

इशारों में धामी को हटाने की मांग
रावत ने अपने बयान में केदारनाथ में आई बाढ़ के समय का ज़िक्र करते हुए धामी सरकार पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा, ‘केदारनाथ आपदा के समय कांग्रेस ने तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को पद से हटाया था।’ रावत के इस बयान को साफ तौर पर इस चुनौती के तौर पर समझा जा रहा है कि वह धामी को सरकार के नेता के तौर पर अक्षम बताते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से उन्हें हटाने की मांग कर रहे हैं।

‘सच तो ये है कि सरकार बुरी तरह फेल हुई’
उत्तराखंड बारिश की चेतावनी से पहले सुरक्षात्मक कदमों के बारे में हरीश रावत ने आरोप लगाते हुए कहा, अतिवृष्टि के लिहाज़ से जो लोग निचले इलाकों में रह रहे थे, वहां से उन्हें हटाए जाने के संबंध में किसी प्रशास​निक अधिकारी और न ही पुलिस को सूचित किया गया। आपदा के बाद के हालात के बारे में भी रावत लगातार राज्य सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, आपद प्रभावित इलाकों में पीने के पानी के लिए टैंकर और साफ सफाई तक की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सच तो यह है कि सरकार बुरी तरह फेल साबित हुई है।’

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