. लक्ष्मी सिनेप्लेक्स की दूसरी मंजिल पर बने बैंक में लगी आग से क्षेत्र में दहशत, रिकार्ड रूम में लगे एसी में ब्लास्ट के बाद धधकी आग
DDC : नक्शा कुछ और मौके पर इमारत बनी कुछ और। नियमों की अर्थी पर बनी ऐसी ही एक इमारत ने सिंधी चौक क्षेत्र को दहशत से भर दिया। शाम ढलते ही इमारत की दूसरी मंजिल पर स्थित नैनीताल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक में अचानक आग लग गई। अंदर ही अंदर आग ऐसी भड़की कि काबू करने में घंटों लग गए। बताया जा रहा है कि आग में बैंक का अधिकांश रिकार्ड जलकर राख हो गया। इस आग को लेकर भी लोगों के मन में सवाल खड़े हो रहे हैं।
सिंधी चौक पर सिनेप्लेक्स की तीन मंजिला इमारत है। इस इमारत में न सेफ्टी का ख्याल रखा गया और न ही आवागमन की व्यवस्था है। वेंटीलेशन यहां है ही नहीं। इमारत की तल में पार्किंग हैं, पहले तल पर मार्केट, दूसरे तल पर बैंक और तीसरे तल पर लक्ष्मी सिनेप्लेक्स है। बताया जाता है कि बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे बैंक को बंद करने की तैयारी चल रही थी कि तभी रिकार्ड रूम से अचानक धमाके की आवाज आई।
बैंक कर्मी मौके पर पहुंचे तो एसी में आग लग चुकी थी, जो तेजी से फैल रही थी। फौरन बैंक में मौजूद करीब आधा दर्जन कर्मी जान बचाकर भाग खड़े हुए। ऊपर सिनेप्लेक्स में मूवी शो शुरू होने जा रहा था, जिसे फौरन बंद कर दिया गया। आनन-फानन में सूचना दमकल और पुलिस को दी गई, लेकिन वेंटीलेशन न होने की वजह से दमकल टीम को अंदर घुसना मुश्किल हो गया। फ्रंट में लगी बैंक की खिड़की को तोड़ा गया। दमघोंटू धुआं निकालने के लिए मशीन लगाई गई। जिसके बाद ऑकसीजन सिलेंडर बांध कर दमकल के जवान बैंक के अंदर दाखिल हुए।
सीएफओ गौरव किरार ने बताया कि करीब चार घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग कैसे लगी है, इसके कारणों की जांच की जा रही है।
बैंक की दहलीज लांघती तो बेकाबू होती आग
जिस स्थान पर लक्ष्मी सिनेप्लेक्स की इमारत है, उसके अगल-बगल और आस-पास पूरा का पूरा बाजार है। यदि आग बैंक से बाहर निकलती तो सबसे पहले सिनेप्लेक्स को अपनी चपेट में लेती। जिसके बाद अलग-बगल मौजूद दुकानें और फिर सिनेप्लेक्स के पीछे रिहायशी इलाका भी चपेट में आ जाता। चंद कदम की दूरी पर सब्जी मंडी, फल मंडी और पूरा आढ़त बाजार है। ऐसी स्थिति में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर आग बैंक की दहलीज लांघ जाती तो फिर बेकाबू हो जाती।
तीन फीट के रास्ते ने रोके कर्मियों के कदम
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि बैंक में धुआं बुरी तरह भर चुका था, जिसे निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा था। ऐसे में बैंक की खिड़कियों को तोड़ना पड़ा, जो इमारत के अंदर ही खुलती हैं। सिर्फ एक को छोड़कर। इस पर बैंक के जिस हिस्से में आग लगी थी, वहां तक जाने का रास्ता सिर्फ तीन फीट चौड़ा था, जो धुंए और आग से भरा था। ऐसे में दमकल कर्मियों के कदम ठिठक गए। पहले धुआं कम करने का इंतजाम किया गया और फिर ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ दमकल कर्मी अंदर दाखिल हुए।
व्यवसायिक इमारत बनाने के क्या हैं नियम
किसी भी व्यवसायिक इमारत को बनाने के लिए कई नियमों का पालन करना पड़ता है। इन्हीं नियमों में से एक है सेट पैक। यानी जिस जमीन पर इमारत का निर्माण होना है, इसके चारों तरफ जमीन का कुछ हिस्सा छोड़ना पड़ता है। ताकि आकस्मिक स्थिति में भाग, जान बचाने और राहत कार्य में उसका उपयोग किया जा सके। ऐसी इमारतों में अंदर दाखिल होने और बाहर निकलने के लिए अलग-अलग रास्ते होने चाहिए। हालांकि लक्ष्मी सिनेप्लेक्स की इमारत नियमों की बलि पर खड़ी की गई है।

