करोड़ों की जालसाजी में जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे समेत 7 पर मुकदमा

– भू-माफिया, अफसर और जिला पंचायत अध्यक्ष की तिकड़ी ने गौलापार में हड़पी सरकारी जमीन, करीब 7.6 एकड़ जमीन को फर्जी कागजों और झूठे दावों के दम पर बना लिया निजी

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Case filed against 7 people including District Panchayat President and son of former Assembly Speaker, DDC : पहाड़ से लेकर मैदान तक सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़े की खबरें तो आती रहती हैं, लेकिन हल्द्वानी में सामने आए एक मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां गौलापार क्षेत्र में 3.107 हेक्टेयर (लगभग 7.6 एकड़) की बेशकीमती सरकारी जमीन को फर्जी कागजात और भ्रष्ट गठजोड़ के जरिए हड़पने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस बड़े घोटाले में नैनीताल की जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल के बेटे समेत सात प्रभावशाली लोगों और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के शामिल होने की बात कही गई है। फिलहाल, आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर काठगोदाम पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

शिकायतकर्ता रविशंकर जोशी ने पुलिस महानिरीक्षक को दी गई तहरीर में गंभीर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। यह पूरा घोटाला हल्द्वानी तहसील के देवला तल्ला पजाया गांव की सरकारी जमीन से जुड़ा है, जिसे बलवंत सिंह पुत्र मोहन सिंह के नाम पर विनियमित (रेगुलराइज) किया गया।

शिकायत के मुताबिक, बलवंत सिंह ने झूठा शपथ-पत्र देकर यह दावा किया कि उनके पास और उनके परिवार के पास 12.5 एकड़ की भूमि सीलिंग सीमा से अधिक जमीन नहीं है। जबकि उनके पास हल्द्वानी के गौलापार, कुंवरपुर और हल्द्वानी-खास जैसे इलाकों में पहले से ही 12.5 एकड़ से कहीं ज्यादा कीमती जमीन दर्ज थी। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों (तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक) ने जानबूझकर यह महत्वपूर्ण तथ्य छिपा दिया।

आरोप है कि 1991 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने इस जमीन पर बलवंत सिंह के कब्जे को अवैध मानते हुए उनके बेदखली का आदेश जारी किया था। वर्ष 2011-2016 में जब विनियमितिकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई, तो इस पुराने बेदखली आदेश को अधिकारियों ने दबा दिया। इसके अलावा, बलवंत सिंह ने जमीन की सरकारी फीस (नजराना) जमा करने की तारीखों को बार-बार बदला और कोई ठोस साक्ष्य नहीं दे पाए। इसके बावजूद, जिलाधिकारी कार्यालय के विरोध को अनदेखा कर विनियमितिकरण को मंजूरी दे दी गई। काठगोदाम थानाध्यक्ष विमल मिश्रा ने बताया कि डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

वारिसों को छोड़ बाहरी को दान, गरीब ने जमा किया करोड़ों का स्टैंप शुल्क
विनियमितिकरण से जमीन का मालिकाना हक मिलते ही, बलवंत सिंह ने अपने दो जीवित पुत्रों को छोड़कर, 10 मार्च 2016 को पूरी 3.107 हेक्टेयर जमीन रविकांत फुलारा निवासी कमलुवागांजा गौड़ को दान कर दी। हैरानी की बात यह है कि इस दाननामे पर 19 लाख का भारी-भरकम स्टैंप शुल्क जमा किया गया। शिकायत में कहा गया है कि कमजोर आर्थिक स्थिति वाले रविकांत फुलारा के लिए इतनी बड़ी रकम जमा करना नामुमकिन था, जो काले धन के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

जिला पंचायत अध्यक्ष समेत सात लोगों को एक ही दिन में बिक्री
रविकांत फुलारा के नाम पर जमीन दर्ज होते ही 9 मई 2016 को उसने पूरी 3.107 हेक्टेयर जमीन को एक ही दिन में सात अलग-अलग लोगों को बेच दिया। इन सात खरीददारों में नैनीताल की ज़िला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरम्वाल पत्नी आनंद दरम्वाल निवासी देवलचौड़ बंदोबस्ती हल्द्वानी (0.253 हेक्टेयर) का नाम भी शामिल है। अन्य खरीददारों में हरेन्द्र सिंह कुंजवाल पुत्र गोविंद सिंह कुंजवाल निवासी सनलाइट इंक्लेव तल्ली बमोरी मुखानी हल्द्वानी, मीनाक्षी अग्रवाल पत्नी भूपेश अग्रवाल निवासी रामपुर रोड हल्द्वानी, अरविन्द सिंह मेहरा पुत्र बलवंत सिंह मेहरा निवासी मल्ला गोरखपुर हल्द्वानी, अजय कुमार गुप्ता पुत्र मंगत राम गुप्ता निवासी गंगा इंक्लेव नवाबी रोड हल्द्वानी, चेतन गुप्ता पुत्र बाबूलाल गुप्ता निवासी वार्ड 15 भोलानाथ गार्डन हल्द्वानी और अनिता गुप्ता पत्नी सतीश चंद्र गुप्ता निवासी घासमंडी हल्द्वानी हैं।

बिक्री से कुल 3,25,66,000 की बड़ी रकम प्राप्त मिली
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस पूरे खेल में राजनैतिक रसूखदार भू-माफियाओं, जिसमें ज़िला पंचायत अध्यक्ष शामिल हैं और भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर काम किया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगी। यह भी संदेह है कि रविकांत फुलारा को बंधक बनाकर धमकी दी गई और बिक्री के बाद मिली 3.25 करोड़ की रकम भी जबरन वापस ले ली गई।

जालसाजी के मुख्य बिंदू
– सीलिंग कानून तोड़ा गया : मुख्य आरोपी बलवंत सिंह ने दावा किया कि उनके पास कम ज़मीन है, जबकि शिकायत के मुताबिक उनके पास कानून द्वारा तय सीमा (12.5 एकड़) से बहुत ज्यादा जमीन पहले से थी।
– अफसरों की मिलीभगत : आरोप है कि तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने बलवंत सिंह के झूठे शपथ-पत्र को जानबूझकर सही माना और 1991 के बेदखली के आदेश को छिपा दिया।
दान फिर तुरंत बिक्री : बलवंत सिंह ने जमीन मिलते ही उसे बाहरी व्यक्ति रविकांत फुलारा को दान कर दिया। फुलारा ने अगले ही दिन यह पूरी जमीन सात बड़े लोगों/भू-माफियाओं को 3 करोड़ 25 लाख में बेच दी।
काले धन का इस्तेमाल : शिकायत में साफ कहा गया है कि यह करोड़ों की डील काले धन से हुई और सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया।

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