बनभूलपुरा हिंसा : एसआईटी करेगी फईम मर्डर केस की जांच, जांच अधिकारी के तबादले के आदेश

– उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बनभूलपुरा हिंसा के दौरान फईम की मौत के मामले में एसआईटी जांच के आदेश दिए

SIT will investigate Faim murder case, DDC : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया कि एक विशेष जांच दल (एसआईटी) फईम की मौत की जांच करेगा, जो पिछले साल 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी में बनभूलपुरा हिंसा के दौरान मारा गया था, उसके परिवार का आरोप है कि उसकी हत्या की गई थी। कोर्ट ने कहा कि वह जांच की प्रगति की निगरानी करेगा।

मृतक के भाई ने की थी सीबीआई जांच की मांग
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ ने फईम के भाई परवेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। परवेज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की थी। याचिका में कहा गया है कि नैनीताल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 6 मई 2024 को पुलिस को मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था। 4 जून को हाईकोर्ट ने पुलिस को मामले में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने कहा, वह खुद करेगी जांच की निगरानी
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवतार सिंह रावत ने बताया कि बुधवार को दाखिल की गई जांच रिपोर्ट पहले जैसी ही थी, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह खुद जांच की निगरानी करेगी। कोर्ट ने डीजीपी उत्तराखंड से जो रिपोर्ट मांगी थी, वही रिपोर्ट पहले हल्द्वानी के सर्किल ऑफिसर ने कोर्ट में दाखिल की थी।

जांच करने वाले पुलिस अधिकारी के स्थानांतरण के आदेश
आज (बुधवार, 18 जून 2025) मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की जांच करने वाले उस समय तैनात पुलिस अधिकारी को नैनीताल जिले से बाहर स्थानांतरित करने के भी आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि फईम के भाई ने आरोप लगाया है कि उसकी मौत हिंसा में नहीं हुई, बल्कि कुछ लोगों ने उसकी हत्या की है। 8 फरवरी, 2024 को बनभूलपुरा हिंसा के दौरान गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी।

मस्जिद और मदरसा ढहाने पर हुई थी हिंसा
बता दें कि नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा इलाके में 8 फरवरी 2024 की शाम को हिंसक झड़पें हुईं, जब नगर निगम अधिकारियों ने दो संरचनाओं – मस्जिद मरियम (मस्जिद) और अब्दुल रज्जाक जकारिया मदरसा – को यह आरोप लगाते हुए गिरा दिया कि वे राज्य सरकार (नजूल) की जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे।

6 लोगों की मौत, 100 से अधिक हुए थे घायल
पुलिस ने कहा कि जब हल्द्वानी नगर निगम और नैनीताल प्रशासन के कर्मचारियों ने 20 साल पुराने ढांचे को गिराया, तो इलाके के निवासियों ने कई वाहनों, एक पुलिस स्टेशन को आग लगा दी और तोड़फोड़ करने वाली टीम के साथ-साथ पुलिसकर्मियों पर पथराव किया। हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

मुख्यमंत्री से लेकर मानवाधिकार तक शिकायत, किसी ने नहीं सुनी
मृतक के भाई परवेज ने न्यायालय को दिए प्रार्थना पत्र में कहा था कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और मानवाधिकार आयोग को की, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। हालांकि इस मामले की जांच बनभूलपुरा पुलिस पहले ही कर चुकी है। जिसकी आख्या भी अदालत में पेश की गई थी, जिसमें पुलिस ने कहा था कि मृतक फईम हिंसा का शिकार हुआ है।

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