– खुद को बहुत बड़ा बिजनेसमैन बताकर लोन पर दिलाई मशीनें, फिर हड़प ली
Cheating by giving gifts, DDC : नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित कालाढूंगी रोड निवासी एक युवक करोड़ों की ठगी का शिकार हो गया। मामला बेहद संगीन है। आरोपी इंजीनियरिंग फर्म और उसके पार्टनरों ने पहले पीड़ित को हुंडई एक्वेटर मशीनें खरीदने के लिए प्रेरित किया, फिर बैंक से लोन दिलाकर मशीनें अपने पास किराये पर रख लीं। कुछ समय तक आंशिक किराया दिया ताकि विश्वास बना रहे, लेकिन धीरे-धीरे किश्तें रोक दीं। यही नहीं, उन्हीं मशीनों को धोखाधड़ी से कई वित्तीय संस्थानों और व्यक्तियों को बार-बार बेचा। मामला सामने आने के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, जिससे मजबूर होकर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली है।
श्याम विहार फेज-2 निवासी वरुण बिष्ट पुत्र पान सिंह ने द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट हल्द्वानी की अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल कर बताया कि उसकी जान-पहचान वर्ष 2018 में अभियुक्त रतीश चन्द्रा से हुई। रतीश ने बताया कि उसकी फर्म मेसर्स यूनीटेक इंजीनियर्स उत्तराखंड और यूपी में हुंडई कंपनी की मशीनरी की डीलरशिप करती है। वरुण को भरोसा दिलाया कि अगर वह मशीन खरीदेगा तो उसे किराये पर लगाकर आसानी से भारी मुनाफा दिला देंगे और ईएमआई की चिंता भी नहीं करनी होगी।
रतीश चन्द्रा और उसके साझेदारों ने वरुण को मशीनें खरीदने के लिए बैंक से लोन दिला दिया। आरोप है कि कुल चार मशीनें 2019 से 2022 के बीच वरुण के नाम पर खरीदी गईं और सभी मशीनें अभियुक्तों ने अपने पास किराये पर रख लीं। समझौते के अनुसार प्रति मशीन 1.50 लाख प्रतिमाह किराया तय हुआ। शुरुआत में आरोपी कभी अपने खाते से, कभी अपनी दूसरी फर्म यूनीटेक एसोसिएट्स से वरुण को आंशिक भुगतान करते रहे, ताकि शक न हो और बाद में भुगतान रोक दिया।
जब वरुण ने मशीनें लौटाने की मांग की तो बड़ी मुश्किल से केवल पहली मशीन नवंबर 2023 में वापस की गई। बाकी तीन मशीनें आज तक गायब हैं। करोड़ों की इस ठगी को अंजाम तक पहुंचाने के लिए जालसाजों ने पीड़ित को कार और आईफोन भी गिफ्ट किया। मुखानी थानाध्यक्ष दिनेश जोशी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर रतीश चन्द्रा पुत्र गिरीश बाबू, तृप्ति भारद्वाज पत्नी रतीश चन्द्रा निवासीगण शांति मैन्सन, विकास नगर फेज 2 कुसुमखेड़ा मुखानी और अरविन्द कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
एक ही मशीन को बेचा तीन-तीन बार!
जांच में चौकाने वाली बात सामने आई कि अभियुक्तों ने वरुण के नाम खरीदी गई चौथी मशीन को अलग-अलग नामों से तीन बार फाइनेंस कराकर बेच डाला। यही नहीं, बाद में उसी मशीन को चौथी बार हल्द्वानी निवासी मनोज सिंह को भी बेच दी। इस धोखाधड़ी से आरोपियों ने मोटा मुनाफा कमाया, जबकि वरुण पर बैंकों का लगभग 1.15 करोड़ का कर्ज चढ़ गया।
होटल प्रोजेक्ट में भी किया खेल
प्रार्थी ने अदालत को बताया कि आरोपी रतीश चन्द्रा और उसकी पत्नी ने उसे और उसकी मां को एक होटल और रिजॉर्ट प्रोजेक्ट में भी पार्टनर बना लिया। बैंक लोन दिलाने के नाम पर उसके खाली हस्ताक्षर कराए और बाद में रकम का दुरुपयोग किया। वर्तमान में होटल का खर्च और बैंक किस्तें भी वरुण ही अपने निजी पैसों से चुका रहा है।
पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, अदालत पहुंचा पीड़ित
वरुण बिष्ट ने पूरी घटना की लिखित शिकायत 18 सितंबर 2024 को एसएसपी को दी थी। शिकायत थाना मुखानी को अग्रसारित भी हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है और भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में अभियुक्तों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।


