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12 घंटे की मैराथन बहस के बाद संसद से वक्फ संसोधन विधेयक पारित

– 8 घंटे तय था बहस का समय, रात 12 बजे शुरू हुई वोटिंग, संसोधन के विरोध में पड़े 232 और पक्ष में पड़े 288 मत

Waqf Bill Passed, DDC : वक्‍फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित हो गया। इस विधेयक पर बहस के लिए आठ घंटे चर्चा का वक्‍त तय था, लेकिन वक्त बढ़ाना पड़ा और 12 घंटे तक बिल पर बहस चली। इस चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस हुई। वक्फ संसोधन विधेयक एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने सदन में ही बिल की प्रति ही फाड़ दी। बहस बुधवार 2 अप्रैल 2025 की दोपहर 12 बजे शुरू हुई और करीब 12 घंटे तक मैराथन बहस चली। हालांकि तमाम विरोधों के बावजूद गुरुवार रात करीब दो बजे यह बिल पारित हो। अब बिल को लेकर राज्य सभा में बहस होगी।

लॉबी क्लियर करने को लेकर हुआ विवाद
रात करीब 12 बजे इस विधेयक को लेकर वोटिंग शुरू हुई। किरेन रिजिजू ने प्रस्ताव रखा तो विपक्ष के कुछ सदस्यों ने मत विभाजन की मांग की। इसके पक्ष में 288 और विरोध में 232 मत पड़े। हालांकि, लॉबी क्लीयर करने के बाद कई सदस्यों को सदन में दाखिल होने देने को लेकर विवाद भी हुआ। विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों का जवाब देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि नए संसद भवन में शौचालय की व्यवस्था लॉबी में ही की गई है और सिर्फ लॉबी से ही सदस्यों को अंदर आने दिया गया है। किसी को भी बाहर से आने की अनुमति नहीं दी गई है।

बोर्ड में गैर मुस्लिमों का मुद्दा ध्वनिमत से खारिज
वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों के प्रावधान को लेकर रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य एनके प्रेमचंद्रन द्वारा प्रस्तुत एक संशोधन पर भी मत विभाजन हुआ। उनका संशोधन 231 के मुकाबले 288 मतों से अस्वीकृत हो गया। विपक्ष के अन्य सभी संशोधनों को सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। वहीं, सरकार की ओर से पेश तीन संशोधनों को सदन की स्वीकृति मिली और विधेयक में खंड 4ए तथा 15ए जोड़े गए। जिस समय विधेयक पर मतदान हो रहा था, सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में मौजूद नहीं थे।

संविधान की मूल भावना पर हमला 
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि यह संविधान की मूल भावना पर आक्रमण करने वाला बिल है। कहा, “आज एक विशेष समाज की जमीन पर सरकार की नजर है, कल समाज के दूसरे अल्पसंख्यकों की जमीन पर इनकी नजर जाएगी। संशोधन की जरूरत है। मैं यह नहीं कहता कि संशोधन नहीं होना चाहिए। संशोधन ऐसा होना चाहिए कि बिल ताकतवर बने। इनके संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे। ये चाहते हैं कि देश के कोने-कोने में केस चले। ये देश में भाईचारे का वातावरण तोड़ना चाहते हैं। बोर्ड राज्य सरकार की अनुमति से कुछ नियम बना सकते हैं। ये पूरी तरह से उसे हटाना चाहते हैं। राज्य सरकार की पावर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। नियम बनाने की ताकत राज्य सरकार को है। राज्य सरकार सर्वे कमिश्नर के पक्ष में नियम बना सकती है। आप सब हटाना चाहते हैं और कह रहे हैं कि ये संशोधन हैं।”

बिल असंवैधानिक था तो अदालत ने रद्द क्यों नहीं किया
वक्फ बिल पर लंबी चर्चा के बाद अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने जवाब देते सभी सांसदों को विधेयक के बारे में अपने विचार रखने के लिए धन्यवाद दिया। कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि बिल असंवैधानिक है और मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि वे कैसे कह सकते हैं कि बिल असंवैधानिक है। अगर यह असंवैधानिक था तो अदालत ने इसे रद्द क्यों नहीं किया? उन्होंने ओवैसी के सवालों पर भी पलटवार किया। कहा, असंवैधानिक जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। बिल संविधान के खिलाफ नहीं है, जैसा कि विपक्ष ने दावा किया है। हमें ‘संवैधानिक’ और ‘असंवैधानिक’ शब्दों का इस्तेमाल इतने हल्के ढंग से नहीं करना चाहिए।

खारिज किए गए विपक्ष के 44 संसोधन
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू ने आठ अगस्त 2024 को यह बिल लोकसभा में पेश किया था। उस वक्‍त बिल को लेकर काफी हंगामा हुआ था। इसके बाद लोकसभा अध्‍यक्ष ने बिल को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया था। जेपीसी का अध्‍यक्ष भाजपा के सांसद जगदंबिका पाल को बनाया गया। इस समिति ने एनडीए के घटक दलों की ओर से पेश 14 संशोधनों के साथ अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की थी। वहीं विपक्ष की ओर पेश 44 संशोधनों को खारिज कर दिया गया। जेपीसी की रिपोर्ट के आधार पर संशोधित बिल को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। इसके बाद बुधवार यानी 3 मार्च को इस बिल को एक बार फिर लोकसभा में पेश किया गया, जहां यह पारित हो गया है।

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