– चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट में बिलीरुबिन 15.40, ओम मीनाक्षी लैब में 9.80 आया
DDC : हल्द्वानी में एक नवजात के पीलिया की जांच रिपोर्ट को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। पिथौरागढ़ निवासी परिजनों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी पिथौरागढ़ को शिकायत भेजकर चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच रिपोर्ट की दोबारा जांच कराने की मांग की है। शिकायत में एक ही समय के आसपास कराई गई जांच में अलग-अलग लैब की रिपोर्ट में बिलीरुबिन (पीलिया) का स्तर काफी अलग आने का दावा किया गया है।
शिकायत ग्राम सैरा उर्फ बड़ोली, गणपाई गंगोली, पिथौरागढ़ निवासी प्रमोद कुमार चंचल के अनुसार नवजात का जन्म 24 सितंबर 2026 को हल्द्वानी के जगदंबा अस्पताल में हुआ था। जन्म के बाद बच्चे को पीलिया की शिकायत थी। उपचार के लिए चार अक्टूबर को बच्चे को हल्द्वानी के वात्सल्य अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले तीन अक्टूबर की लाल पैथ लैब की रिपोर्ट में बच्चे का बिलीरुबिन स्तर 13.90 बताया गया था।
वात्सल्य अस्पताल में 24 घंटे की फोटोथेरेपी के बाद पांच अक्टूबर को अस्पताल की ओर से चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर हल्द्वानी में बच्चे के खून का नमूना जांच के लिए भेजा गया। शिकायत में बताया गया है कि चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट में बिलीरुबिन का स्तर बढ़कर 15.40 आया। इसके आधार पर डॉक्टर प्रमोद कुमार प्रजापति ने बच्चे को फिर 24 घंटे की फोटोथेरेपी देने की सलाह दी।
छठे अक्तूबर को दोबारा जांच के लिए खून का नमूना लिया गया। इसी दौरान परिजनों को चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट गलत होने की जानकारी मिली। इसके बाद डॉक्टर की सलाह पर एक ही समय में दो लैबों में नमूने भेजे गए। इनमें एक नमूना चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर और दूसरा ओम मीनाक्षी डायग्नोस्टिक सेंटर हल्द्वानी भेजा गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट में बच्चे का बिलीरुबिन स्तर 14.00 आया, जबकि ओम मीनाक्षी डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट में यह 9.80 पाया गया। शिकायत में कहा गया है कि डॉक्टर के अनुसार बच्चे में बिलीरुबिन का स्तर सामान्य से अधिक था और फोटोथेरेपी जैसे उपचार की आवश्यकता थी, लेकिन लगातार अलग-अलग रिपोर्ट आने से परिजन असमंजस में हैं।
परिजनों ने चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर से नमूने की अन्य लैब में जांच कराने के लिए सैंपल मांगा, लेकिन शिकायत के अनुसार सेंटर की ओर से सैंपल उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बाद संबंधित पुलिस चौकी से फोन कर सैंपल को आगे की कार्रवाई के लिए सुरक्षित रखने को कहा गया।
परिजनों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.रश्मि पंत से दोनों नमूनों की दोबारा जांच कराकर मामले में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि गलत जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाज होने से किसी व्यक्ति की जान को खतरा हो सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं।
रिपोर्टों की तारीख और बिलीरुबिन स्तर को क्रम में रखें तो स्थिति यह बनती है—
| तारीख | लैब | टोटल बिलीरुबिन |
|---|---|---|
| 30 सितंबर | निदान डायग्नोस्टिक सेंटर | 12.4 mg/dL |
| 3 अक्टूबर | लाल पैथलैब | 13.94 mg/dL |
| 5 अक्टूबर | चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर | 15.40 mg/dL |
| 6 अक्टूबर | चंदन डायग्नोस्टिक सेंटर | 14.00 mg/dL |
| 6 अक्टूबर | ओम मीनाक्षी हेल्थ केयर | 9.80 mg/dL |


