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– इतिहास है, जिसकी रही केंद्र में सरकार, उसी ने जीती पांचों लोकसभा सीटें

History of Uttarakhand Lok Sabha Elections, DDC : कांग्रेस पूरे दम-खम के साथ चुनावी मैदान है, लेकिन उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव का इतिहास कांग्रेस के पक्ष का नहीं है। क्यों हर बार ऐसा ही हुआ कि जिसकी केंद्र में सरकार रही, उसी दल ने उत्तराखंड की पांचों लोकसभी सीटों पर कब्जा किया। हालांकि दो बार इतिहास खुद को दोहरा भी नहीं पाया, लेकिन फैसला फिर भी केंद्र सरकार के पक्ष में ही गया। ऐसे में कांग्रेस के लगातार गिरते ग्राफ को न सिर्फ बढ़ाना बल्कि चुनाव जीतना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है।

बता दें कि वर्ष 1989 और 2004 में ही ऐसा हुआ कि सत्ता में आने वाली पार्टी को उत्तराखंड की कुल पांच सीटों में से तीन से कम सीटें मिली। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पांचों सीटें भारतीय जनता पार्टी ने जीती और केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी। इसी तरह वर्ष 2019 में भी इतिहास ने खुद को दोहराया और भारतीय जनता पार्टी ने फिर से पांचों लोकसभा सीटों पर कब्जा किया और फिर केंद्र में भाजपा की सरकार बनी। अब वर्ष 2024 में एक बार फिर भाजपा न सिर्फ बड़ी जीत का दावा कर रही है, बल्कि पांचों सीटें जीत कर हैट्रिक लगाने का मन बना चुकी है।

31 प्रतिशत पर सिमट गई थी कांग्रेस, भाजपा को 60 प्रतिशत
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने न सिर्फ सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की, बल्कि 2014 के मुकाबले जीत का अंतर भी काफी रहा। 2019 में भाजपा ने 60 प्रतिशत वोट हासिल किए और कांग्रेस करीब 31 प्रतिशत वोटों पर सिमट गई थी। तब अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ सीट पर भाजपा के अजय टम्टा ने करीब 2.20 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। जबकि 2014 में अजय टम्टा करीब 95 हजार वोटों के अंतर से जीते थे। इस बार फिर भाजपा से अजय टम्टा और कांग्रेस से प्रदीप टम्टा आमने-सामने हैं।

गढ़वाल सीट पर भी भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ा। इस सीट से तीरथ सिंह रावत ने 2019 में करीब 2.85 लाख वोटों से जीत दर्ज की और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इस सीट पर करीब 1.84 लाख वोटों के अंतर से जीती थी। गढ़वाल सीट पर इस बार भाजपा ने मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी को उतारा है और कांग्रेस ने गणेश गोदियाल ने उन्हें टक्कर दे रहे हैं। 2019 में हरिद्वार में भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक ने 2.54 लाख वोटों के अंतर से कांग्रेस को हराया था। जबकि 2014 का चुनाव निशंक 1.77 लाख वोटों के अंतर से जीते थे। हरिद्वार से इस बार पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे वीरेंद्र रावत के बीच टक्कर है।

साढ़े 3 लाख से अधिक वोट से हार गए थे हरीश रावत
पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने नैनीताल संसदीय सीट से हरीश रावत को उतारा था और तब उनके सामने भाजपा से अजय भट्ट थे। इस चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को साढ़े 3 लाख से अधिक मतों से करारी शिकस्त मिली थी। इस बार भाजपा ने फिर अजय पर भरोसा जताया है और कांग्रेस ने टक्कर देने मैदान में प्रकाश जोशी को उतारा है। इसके इतर अगर टिहरी-गढ़वाल सीट की बात करें तो वर्ष 2019 में यहां भी भाजपा का दबदबा था। तब भाजपा की माला राज्यलक्ष्मी ने करीब 2.91 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। जबकि 2014 में यह अंतर 1.92 लाख वोटों का था।

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