• जल जीवन मिशन ने बढ़ाई कौंता गांव की मुसीबत, पांच महीने से सूखे पड़े नल, मिड-डे मील के लिए भी दूर से लाना पड़ रहा पानी
Water crisis in Kaunta, DDC : नैनीताल जिले में ओखलकांडा ब्लॉक के कौंता गांव में जल जीवन मिशन की हकीकत सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। पिछले करीब पांच महीनों से गांव के नलों में एक बूंद पानी तक नहीं आया, जिससे ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बच्चों की प्यास बुझाने के लिए भोजन माताओं को सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है।
गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में 24 और जूनियर हाईस्कूल में 12 छात्र पढ़ते हैं, लेकिन इन स्कूलों में पीने तक का पानी उपलब्ध नहीं है। हालात इतने खराब हैं कि मिड-डे मील बनाने के लिए भोजनमाताओं को दूर-दूर से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत गांव में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन बिना ठोस योजना के किए गए काम के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई।
ग्रामीणों के अनुसार स्कूलों के कनेक्शन से ही पूरे गांव की लाइन जोड़ दी गई, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हो गई। पंपिंग योजना के तहत चार स्थानों पर टैंक बनाए गए, लेकिन निर्माण में अनियमितताओं और लापरवाही के कारण पानी की सप्लाई शुरू ही नहीं हो पाई।
बताया जा रहा है कि पिछले एक महीने से पंप खराब पड़े हैं, लेकिन उन्हें ठीक कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। जल निगम के अधिकारी जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल रहे हैं, जबकि लाइन की देखरेख करने वाले कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्होंने भी काम बंद कर दिया है।
इसका नतीजा यह है कि मल्ला कौंता, सीतापातल, मल्ला सेलगांजा, चुरानीखाल, सिमलखेत, पुरनागांव और वीरपहाड़ जैसे तोकों में रहने वाले करीब 100 से अधिक परिवार पानी के लिए तरस रहे हैं। कई महिलाएं और बुजुर्ग रोजाना किलोमीटरों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले गांव में पानी की व्यवस्था ठीक थी, लेकिन जल जीवन मिशन लागू होने के बाद हालात और बदतर हो गए। अब लोगों का सब्र टूटने लगा है। गांव के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि पानी कोई सुविधा नहीं बल्कि बुनियादी अधिकार है और जब स्कूलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, तो यह पूरी व्यवस्था की विफलता है।
ग्रामीणों की जुबानी
भवान सिंह, ग्रामीण
“पिछले करीब पांच महीनों से गांव के नलों में पानी नहीं आया। पहले व्यवस्था ठीक थी, लेकिन जल जीवन मिशन के बाद हालात और खराब हो गए हैं। अब हमें रोज दूर से पानी लाना पड़ रहा है।”
खीम सिंह, ग्रामीण
“गांव में पाइपलाइन तो डाल दी गई, लेकिन पानी की सप्लाई शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार अधिकारियों को बताया, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”
दीवान सिंह, ग्रामीण
“पंप एक महीने से खराब पड़े हैं। विभाग और ठेकेदार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।”
त्रिलोक सिंह, ग्रामीण
“गांव के स्कूलों में भी पानी नहीं है। बच्चों और शिक्षकों को दिक्कत हो रही है और मिड-डे मील के लिए भी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। प्रशासन को तुरंत समाधान करना चाहिए।”


