– एसएसपी नैनीताल ने खोला राज, अजय योगा सेंटर मालिक का भाई गिरफ्तार, आलाकत्ल बरामद
Yoga trainer Jyoti murder case, DDC : उत्तराखंड में नैनीताल जिले के मुखानी थाना क्षेत्र में महिला योगा ट्रेनर ज्योति मेर की हत्या ने हल्द्वानी को झकझोर दिया। पुलिस ने लंबी पड़ताल के बाद मामला सुलझाने का दावा किया है। गिरफ्तार आरोपी अभय कुमार उर्फ राजा (24 वर्ष) वही युवक है, जो अपने बड़े भाई अजय के साथ अजय योगा एंड फिटनेस सेंटर चलाता था। पुलिस के मुताबिक आर्थिक, परिवारिक तनाव और कथित निजी रिश्तों की खटास इस जघन्य हत्याकांड की वजह बनी। हत्या के तुरंत बाद आरोपी नेपाल भाग निकला, लेकिन लगातार लोकेशन-ट्रैकिंग और जमीनी दबिश के बाद उसे 19 अगस्त 2025 को नगला तिराहा के पास से दबोच लिया गया। उसके कब्जे से हत्या के लिए इस्तेमाल किया गया दुपट्टा भी बरामद किया है।
केस की शुरुआत : एक माँ की तहरीर और शक के निशाने
3 अगस्त 2025 को मुखानी थाने में दर्ज तहरीर में वादिनी दीपा मेर निवासी हल्दुचौड़, तुलारामपुर, थाना लालकुआं ने बताया कि उनकी बेटी ज्योति मेर पत्नी कमल सबलानी, मूल निवासी जोधपुर, राजस्थान) जेके पुरम, छोटी मुखानी में आशा पांडे के घर की तीसरी मंजिल पर किराए से रह रही थी और पास ही स्थित अजय योगा एंड फिटनेस सेंटर में महिला योगा ट्रेनर के रूप में कार्यरत थी। माँ ने हत्या का शक सेंटर मालिक अजय यदुवंशी और उसके छोटे भाई अभय यदुवंशी उर्फ राजा पर जताया। तहरीर के आधार पर थाने में धारा 103(1)/3 (5), बीएनएस में मुकदमा पंजीकृत किया गया।
पहला सुराग : कैमरों की नजर से निकलता एक साया
एसएसपी प्रह्लाद नारायण मीणा के निर्देश पर सीओ नितिन लोहनी के नेतृत्व में कई टीमों ने घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी स्कैनिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक कैमरे में ज्योति के कमरे की दिशा से निकलता दिखाई दिया। छवि-साम्य और स्थानीय इनपुट से उसकी पहचान अभय कुमार उर्फ राजा के रूप में हुई, जो मूलरूप से गोल चौक, वाल्मीकि नगर, पश्चिमी चंपारण (बिहार) और वर्तमान में योगा सेंटर के परिसर में रहना है।
‘भागकर नेपाल’: लोकेशन, नेटवर्क और लंबी दबिश
पुलिस ने अभय के मूल पते और संभावित लोकेशंस पर दबिश दी। बॉर्डर एरिया में मूवमेंट की संभावना देखते हुए टीम नेपाल रूट पर भी सक्रिय हुई। तकनीकी निगरानी, इनपुट्स और जमीनी नेटवर्किंग के बाद पुलिस ने 19 अगस्त को नगला तिराहा के पास उसे पकड़ लिया। यह गिरफ्तारी, पुलिस के मुताबिक, नेपाल होते हुए बनबसा रूट से वापसी/ट्रांजिट के दौरान हुई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसने हत्या की मंशा और तैयारी, दोनों पर रोशनी डाली।
पुलिस के मुताबिक ‘मोटिव’: रिश्तों की खटास, घर-खर्च का विवाद
पुलिस पूछताछ में अभय ने कुबूल किया कि चन्दन डायग्नोस्टिक के टॉप फ्लोर में उसके बड़े भाई अजय के नाम से चल रहे अजय फिटनेस योगा सेंटर में मैनजमेंट की जिम्मेदारी अभय देखता था। इसी सेंटर में ज्योति भी ट्रेनर के तौर पर काम करती थी। अजय और ज्योति के बीच ‘निजी संबंध’ बन गए थे। परिवार और सेंटर के भीतर पैदा तनाव के चलते अजय ने अभय का खर्चा बंद कर दिया और उसे घर से भी निकाल दिया। इसी गुस्से और प्रतिशोध में अभय ने ज्योति के कमरे में घुसकर उसके दुपट्टे से पीछे से गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद वह टैक्सी से बनबसा गया और वहां से नेपाल निकल गया।
घटनास्थल का ब्यौरा : तीसरी मंजिल का कमरा, पड़ोसियों की चुप्पी
जेके पुरम, छोटी मुखानी के एक मकान की तीसरी मंजिल पर ज्योति किराए से रहती थी। पुलिस के मुताबिक कमरे में हाथापाई के बहुत कई निशान नहीं मिले, जिससे संभावना बनती है कि हमला अचानक और साइलेंट तरीके से हुआ। कमरे से दुपट्टा बरामद हुआ, जो बाद में अभय के कब्जे से भी मिला और इसे हत्या का औजार बताया गया है। पड़ोसियों से बातचीत में पता चला कि ज्योति सुबह-शाम सेंटर जाती थी, डिसिप्लिन्ड और कम बोलने वाली थी। जिस रात/सुबह घटना हुई, अधिकांश पड़ोसी किसी चीख-पुकार से इंकार करते हैं, जो गला दबाने जैसे शांत तरीके के अपराध की ओर इशारा करता है।
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक : केस की रीढ़
पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जिसे पुलिस ने केस-डायरी का हिस्सा बनाया है, उसके अनुसार गर्दन पर दबाव के प्राथमिक संकेतों ने अस्फिक्सिया (दम घुटने) की दिशा में जांच को मजबूत किया। फोरेंसिक की दृष्टि से दुपट्टे पर पाए गए ट्रेस एविडेंस (फाइबर/स्वेट/डीएनए) केस की चेन ऑफ एविडेंस की अहम कड़ी होंगे। फोरेंसिक विशेषज्ञ कहते हैं, “स्ट्रैंगुलेशन के मामलों में कपड़े/रस्सी जैसे सॉफ्ट-लिगेचर पर माइक्रो-ट्रेस महत्वपूर्ण होते हैं। साफ-सुथरी सीलिंग, सैंपल की कस्टडी और लैब प्रोटोकॉल, ये सब अदालत में केस की विश्वसनीयता तय करते हैं।”
प्रोफाइल : पीड़िता और आरोपी
ज्योति मेर : राजस्थान के जोधपुर से हल्द्वानी आकर महिला योगा ट्रेनर के तौर पर अपनी पहचान बना रही थी। पास के स्कूल और कॉलोनियों में मॉर्निंग-क्लासेस चलातीं, महिलाओं में लोकप्रिय थीं।
अभय कुमार उर्फ राजा : 24 वर्ष, मूल पश्चिमी चंपारण, बिहार। अपने बड़े भाई के साथ सेंटर का ऑपरेशनल मैनेजमेंट संभालता था। पुलिस के अनुसार, आर्थिक/पारिवारिक तनाव और ईर्ष्या अपराध का प्रेरक कारण बने।
लोकल रिएक्शन : भरोसा, भय और असहज सवाल
हत्या की खबर के बाद योगा-सर्किल और स्थानीय बस्तियों में चिंता और आक्रोश है। महिला प्रशिक्षार्थी कहती हैं, “हम फिटनेस के लिए सेंटर जाते हैं, वहां सेफ़्टी सबसे पहली जरूरत है। प्रशासन को महिला ट्रेनरों की सुरक्षा के स्टैंडर्ड्स तय करने चाहिए।” आसपास के दुकानदारों ने बताया कि सेंटर में अक्सर सुबह-सुबह और शाम को भीड़ रहती थी, “लड़की प्रोफेशनल लगती थी, अपने काम से काम।”
पुलिस की पड़ताल : टीमवर्क और तकनीक का मेल
एसएसपी मीणा ने केस के अनावरण पर टीम को 2,500 रुपए का प्रोत्साहन दिया है। जांच में शामिल पुलिसकर्मियों की सूची बताती है कि एकाधिक टीमों ने फुटेज-स्कैनिंग, ट्रैवल-रूट मैपिंग और फील्ड-इंटरोगेशन का समानांतर संचालन किया। पुलिस टीम में मुखानी थानाध्यक्ष दिनेश चन्द्र जोशी, एसआई वीरेंद्र चन्द, एसआई बिरेन्द्र सिंह बिष्ट, एसआई नरेन्द्र कुमार, एसआई हरजीत सिंह, कांस्टेबल सुनील आगरी, कांस्टेबल रोहित कुमार, कांस्टेबल सुरेश देवड़ी, कांस्टेबल रविन्द्र खाती, कांस्टेबल बलवन्त सिंह, कांस्टेबल धीरज सुगड़ा, कांस्टेबल शंकर सिंह, कांस्टेबल राजेश (एसओजी), कांस्टेबल अरविन्द (एसओजी), कांस्टेबल अनूप तिवारी, कांस्टेबल प्रवीण सिंह, कांस्टेबल गंगा मठपाल थे।
विशेषज्ञों की राय : ‘क्राइम ऑफ पैशन’ में पैटर्न और प्रिवेंशन
क्रिमिनोलॉजिस्ट का दृष्टिकोण : निजी रिश्तों में आर्थिक निर्भरता, ईर्ष्या और रिजेक्शन अक्सर क्राइम ऑफ पैशन को जन्म देते हैं। ऐसे अपराध प्री-प्लान्ड हों या इम्पल्सिव, इनके बाद का भागने का पैटर्न आमतौर पर नजदीकी सीमाओं/हाईवे की ओर दिखता है। यही वजह है कि बॉर्डर-रूट्स और ट्रांजिट-पॉइंट्स पर पुलिस की अर्ली इंटेलिजेंस निर्णायक साबित होती है।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट : “लंबे समय तक चली ‘खटास’ में क्रॉनिक फ्यूरी विकसित हो जाती है। अगर आरोपी को लगता है कि उसकी भूमिका/पोजीशन छीनी जा रही है, तो कंट्रोल-रीगेन करने की हिंसक कोशिश सामने आ सकती है। ऑफिस/स्टूडियो जैसे वर्क-स्पेस में काउंसलिंग और ग्रिवेन्स-रिड्रेसल मैकेनिज्म जरूरी है।”
‘फिटनेस इंडस्ट्री’ की अनौपचारिकता पर सवाल
इस केस ने स्थानीय फिटनेस/योगा इंडस्ट्री में रेगुलेशन और सेफ्टी प्रोटोकॉल की कमी पर उंगली उठाई है। अधिकतर सेंटर किराए की जगहों या रिहाइशी इमारतों के भीतर चल रहे हैं जहाँ बेसिक वेरिफिकेशन (स्टाफ/ट्रेनर/ट्रैनी) अक्सर लैक्स होता है। सीसीटीवी कवरेज असंगत होता है (एंट्री-लॉबी है, पर आंतरिक गलियारों में नहीं), महिला ट्रेनर/ट्रैनी के लिए SOP (रात में क्लास, अकेले लौटना, पीजी/हॉस्टल कनेक्ट) अस्पष्ट होते हैं।


