– सोशल मीडिया बैन से हिली नेपाली सत्ता, युवाओं ने फूंकी संसद, ओली सरकार का पतन
Nepal’s Gen Z Revolution, DDC : नेपाल इन दिनों एक ऐसी हलचल से गुज़र रहा है, जिसकी गूंज न केवल उसके राजनीतिक गलियारों में बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में सुनाई दे रही है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सरकार के प्रतिबंध ने युवाओं को इस कदर आक्रोशित कर दिया कि सड़कों पर उतरते ही यह विरोध एक ऐतिहासिक जनआंदोलन में बदल गया। इसे नाम दिया गया “Gen Z आंदोलन”।
🔥 कैसे शुरू हुआ आंदोलन
4 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पाबंदी लगाई। दरअसल, सरकार ने सोशल मीडिया साइट्स को रजिस्ट्रेशन कराने को कहा था और इसके लिए समय सीमा तय की थीम समय सीमा नही गई और सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के मालिकों ने रजिस्ट्रेशन नही कराया। जसके बाद नेपाली सरकार ने इन पर बैन लगा दिया। सरकार का तर्क था कि ये प्लेटफॉर्म समाज में अराजकता और भ्रम फैला रहे हैं, लेकिन यह कदम सीधे युवाओं की आज़ादी पर प्रहार साबित हुआ।
युवा वर्ग, जो डिजिटल कनेक्टिविटी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, इसे बर्दाश्त नहीं कर सका और 7 सितंबर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
🚨 हिंसा और संसद पर हमला
शुरुआत में शांति से चल रहे प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए। काठमांडू की सड़कों पर हज़ारों युवा उतर आए। पुलिस ने आंसू गैस, वाटर कैनन और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। कई जगहों पर लाइव फायरिंग तक हुई।
8 और 9 सितंबर को हालात सबसे बेकाबू रहे—प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन में घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी। इस टकराव में अब तक करीब 30 लोगों की मौत और 1,000 से ज़्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
🏛️ ओली सरकार का पतन
लगातार दबाव, खूनखराबे और संसद पर हुए हमले के बाद प्रधानमंत्री K. P. शर्मा ओली को आखिरकार 9 सितंबर को इस्तीफा देना पड़ा।यही नहीं, सरकार को सोशल मीडिया बैन भी वापस लेना पड़ा।
हालांकि इस्तीफे के बावजूद देश में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है और अब सवाल उठ रहा है—नेपाल की बागडोर किसके हाथ में होगी?
⚖️ अंतरिम नेतृत्व की तलाश
आंदोलनकारी अब भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी शासन की मांग कर रहे हैं। अंतरिम सरकार के लिए कई नाम चर्चा में हैं—
– पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की,
– काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह,
– और कुछ युवा कार्यकर्ता भी।
– नेपाल की सेना भी इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रही है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय गूंज
नेपाल का यह आंदोलन सिर्फ एक देश की राजनीतिक हलचल नहीं, बल्कि डिजिटल युग में युवा शक्ति की ताक़त का उदाहरण माना जा रहा है। दुनिया भर के विश्लेषक इसे “डिजिटल क्रांति” करार दे रहे हैं।


