– कमीशन से मालामाल होने की चाहत में विदेशों में बैठे साइबर माफिया के लिए साइबर पैडलर बन रहे युवा
Cyber peddler in Banbhulpura, DDC : नैनीजाल जिले का एक इलाका बनभूलपुरा भी झारखंड के जामताड़ा और राजस्थान के मेवात जैसा हो चला है। हालांकि बनभूलपुरा का युवा सीधे तौर पर साइबर क्राइम नहीं कर रहा, लेकिन कमीशन से कुछ ही दिनों में मालामाल होने की चाहत पाल बैठे ये युवा विदेशों में बैठे साइबर माफिया के हाथ में खेल रहे हैं। सीधे तौर पर ये युवा इन माफिया के लिए साइबर पैडलर के तौर पर काम कर रहे हैं। इसके लिए इन्हें सिर्फ एक बैंक खाते की जरूरत होती है।
इसी वर्ष मई में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। मामला तब खुला जब बनभूलपुरा के एमएस बेकर्स में काम करने वाले कर्मचारी रमेश चंद्र का मालिक साजिद ने फर्जी तरीके से उसका चालू खाता खुलवा दिया। इस खाते में चंद मिनट में 1.20 करोड़ रुपये जमा हो गए। ये रकम साइबर क्राइम की थी। रमेश के खाते में जमा हुई रकम से उसे सिर्फ कुछ प्रतिशत कमीशन मिलना था।
सूत्रों का कहना है साजिद अपने एक दर्जन से अधिक साथियों के साथ बनभूलपुरा में साइबर पैडलर की गैंग खड़ा कर रहा था। बताया तो यहां तक जाता है कि इन लोगों का संपर्क दुबई में बैठे किसी व्यक्ति से है, जो इनके खातों में रुपए ट्रांसफर करता है। इस मामले में शिकायत मिलने पर पुलिस ने साजिद, अनस, हसनान, कैफ, रमीज, करन, प्रियांशु ठाकुर, सिकंदर हुसैन, यूसुफ, वाजिद, मोनिस और नितिन अटवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
अब पूरे खेल में दिल्ली पुलिस की भी एंट्री हो गई। दिल्ली पुलिस ने रमेश चंद्र के बैंक खातों की जांच की है और बीते शनिवार को बनभूलपुरा पहुंची दिल्ली पुलिस मोहम्मद शादाब अंसारी, अनस अंसारी और मोहम्मद दानिश को उठा कर ले गई। दिल्ली पुलिस इस बात की संभावना भी तलाश रही है कि कहीं ये लोग सीधे तौर पर तो साइबर क्राइम से नहीं जुड़े हैं।
गरीब का करंट अकाउंट, बैंक से सरकारी दफ्तर तक की मिलीभगत
करंट अकाउंट आम लोग नहीं खोलते। इसे खोलने वाले अधिकांश व्यापारी, उद्यमी होते हैं या फिर किसी कंपनी के नाम पर यह अकाउंट खोला जाता है। बावजूद इसके बेकरी में काम करने वाले रमेश का करंट अकाउंट था। महज कुछ हजार की नौकरी करने वाला इस खाते को बैंक में नहीं खुलवा सकता, लेकिन बनभूलपुरा के जालसाजों ने इसे मुम्किन कर डाला। एक फर्जी व्यापार दिखा कर उद्यम विभाग से रमेश का फर्जी उद्यम सर्टिफिकेट बनवाया। फिर उसके आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा में उसका खाता आरसी इंटरप्राइजेज के नाम से खुलवा दिया। गहराई में जाएं तो इसमें बैंक से लेकर सरकारी दफ्तर की मिली भगत के संकेत भी दिखते हैं।
एसपी सिटी मनोज कत्याल का कहना है कि साइबर ठगी के एक मामले में दिल्ली पुलिस हल्द्वानी पहुंची थी। जिसपर शक के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करके अपने साथ ले गई है। हल्द्वानी में भी युवकों से पूछताछ की गई। प्रकरण दिल्ली का है इसलिए पुलिस टीम अब उनसे वहीं पर पूछताछ करेगी।
यूपी से आकर फैलाया ठगी का जाल, फर्जी खातों में भरी रकम
इस मामले का खुलासा इसी वर्ष 31 जनवरी को हुआ। फर्जी आधार कार्ड और जाली नाम पते से जारी सिम के जरिये बैंक में चालू खाता खोलकर उसमें साइबर ठगी की रकम जमा कर निकालने वाले गिरोह का मुखानी पुलिस और एसओजी ने पर्दाफाश किया है। छह लोग गिरफ्तार किए गए, जो यूपी के लखनऊ, देवरिया और शाहजहांपुर के थे। सभी चौपला चौराहा के निकट तारा कॉम्प्लेक्स के एक कमरे में ठहरे थे।
इनसे बैंकों में अकाउंट खोलने के फार्म, मुहर, आधार कार्ड, उद्यम विभाग के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य सामग्री मिली थी। इन्हीं प्रमाण पत्र के बैंकों में खाते खुलवाते और डेबिट कार्ड, चेकबुक अपने सरगना चार्ली उर्फ केके को देते थे। इसके बदले वह उन्हें 25 हजार रुपये नकद देता था। बाद में रुपये के लेने-देन पर भी 10 से 15 प्रतिशत रकम मिलती थी। इस मामले में मास्टरमाइंड राघवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रघु, राघवेंद्र, लकी, रॉकी, रोहन खान और आकाश सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।


