Breaking News
बद्रीनाथ चढ़ावा चोरी के आरोप में प्रमोद नौटियाल गिरफ्तार।
बद्रीनाथ मंदिर चंदा चोरी में प्रमोद नौटियाल गिरफ्तार
प्राइड हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत।
प्राइड हॉस्पिटल में पथरी का ऑपरेशन, मर गया मरीज
किसान के 9 लाख से साइबर क्रिमिनल ने कर डाली शॉपिंग।
तीन कॉल… सिम बंद… और एक घंटे में 9.29 लाख की ऑनलाइन शॉपिंग, हल्द्वानी में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला
बनभूलपुरा में लोन के नाम पर ठगी।
गुजरात के जालसाजों ने बनभूलपुरा के लोगों को लगाया चूना
गौला नदी में छलांग लगाने वाला प्रियांशु बिष्ट व नदी में तलाश करती एसडीआरएफ टीम।
मां ने मोबाइल नहीं दिया, 12वीं का छात्र पुल से गौला नदी में कूदा
रामनगर के रिजॉर्ट में सैक्स रैकेट और नकली नोटों का भंडाफोड़।
रात चल रही थी रंगीन पार्टी… अचानक पुलिस की एंट्री, रामनगर के रिजॉर्ट में मचा हड़कंप
पति की मौत के सदमे में पत्नी ने जहर खाकर जान दी।
पति की मौत, सदमे में 80 साल की पत्नी ने खाया जहर
एमटीएस भर्ती परीक्षा में पकड़ा गया डमी अभ्यर्थी।
एमटीएस भर्ती परीक्षा में फर्जी अभ्यर्थी पकड़ाया, दूसरे की जगह दे रहा था परीक्षा
काठगोदाम इंटर कॉलेज में चॉपर की इमरजेंसी लैंडिंग।
खराब मौसम में फंसा चॉपर, काठगोदाम में करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग

कश्मीरी पंडितों को वापस लाने की तैयारी में सरकार, 34 सालों में लौटे सिर्फ 3800

– वर्ष 2019 के बाद एक भी कश्मीरी पंडित वापस नहीं लौटा, सामूहिक आवास का प्रबंध कर सुरक्षित स्थानों में भेजा जायेगा

Kashmiri Pandit, DDC : कश्मीरी पंडितों को कश्मीर से पलायन किए हुए 34 साल हो गए हैं। घर वापसी की इच्छा पाले कश्मीरी पंडित परिवारों की वापसी की कोशिशों को आतंकी लगातार नेस्तनाबूद करते रहे हैं। हालांकि पिछले 15 सालों में 3800 कश्मीरी पंडित कश्मीर लौटे तो सही, पर सरकारी कर्मचारी बन कर। अब एक बार फिर उनकी घर वापसी की योजनाएं तैयार की जा रही हैं जिसके तहत उमर सरकार करीब 4800 परिवारों को कश्मीर वापस लाने की केंद्र की योजना को अमली जामा पहनाने की तैयारी में जुटे तो हैं पर एक कड़वी सच्चाई यह है कि 5 अगस्त 2019 की कवायद के उपरांत एक भी कश्मीरी पंडित परिवार कश्मीर में वापस नहीं लौटा है।

39782 ने एक साथ छोड़ा था कश्मीर
ऐसा भी नहीं है कि 34 साल पहले अपने घरों का त्याग करने वाले कश्मीरी पंडितों में कुछेक कश्मीर वापस नहीं लौटना चाहते है। इन 34 सालों के निर्वासित जीवन यापन के बाद आज भी उन्हें अपने वतन की याद तो सता ही रही है, साथ ही रोजी-रोटी तथा अपने भविष्य के लिए कश्मीर ही ठोस हल के रूप में दिख रहा है। लेकिन इस सपने के पूरा होने में सबसे बड़ा रोड़ा यही है कि कश्मीर में अब उनका कोई अपना नहीं है। वर्ष 1990 में 19 जनवरी के दिन कश्मीर से जब हिन्दुओं का पलायन आरंभ हुआ तो अगले कुछ ही हफ्तों में, सरकारी अंकड़ों के मुताबिक, 39782 परिवार जम्मू समेत देश के विभिन भागों में शरणार्थी के तौर पर रहने लगे।

आरक्षण स्कीम से लौटे 3800 कश्मीरी पंडित
आधिकारिक आंकड़ों के ही अनुसार, तब करीब 4385 मुस्लिम व सिख परिवारों ने भी कश्मीर का त्याग किया था। इन 34 सालों में तत्कालीन सरकारों की वे कोशिशें हमेशा मुंह के बल ही गिरी जिनके तहत वे कश्मीरी पंडित परिवारों को कश्मीर लौटाना चाहते थे। करोड़ों रुपया भी खर्च किया गया पर हर बार आतंकी हिंसा, हमले, नरसंहारों, आतंकी धमकियों और चेतावनियों ने सबके कदमों को रोक दिया। हालांकि वर्ष 2008 और 2015 में केंद्र सरकर की प्रोत्साहन स्कीमों के तहत कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीर में सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाना आरंभ हुआ तो अभी तक कुल 3800 कश्मीरी पंडित ही कश्मीर लौट पाए हैं।

जहां कोई अपना नहीं, वहाँ बसने का संजोए हैं सपना 
सरकारी दावा है कि इनमें से 520 कश्मीरी पंडित धारा 370 की समाप्ति के बाद लौटे हैं और करीब 2000 अगले कुछ दिनों में लौट सकते हैं। पर ये दावे सच्चाई के धरातल पर टिकते नहीं दिखते। इतना जरूर है कि इक्का दुक्का कश्मीरी पंडित परिवारों का कश्मीर वापस लौटना भी जारी है। मगर उनमें से कुछेक कुछ ही दिनों या हफ्तों के बाद वापस इसलिए लौट आए क्योंकि उन्हें आतंकियों का निशाना बनाने डर है। वहीं कईयों को अपने ‘लालची’ पड़ोसियों के ‘अत्याचारों’ से तंग आकर भी भागना पड़ा। कश्मीर वापस लौटने की इच्छा रखने वाले कश्मीरी पंडितों के लिए यह सबसे अधिक कष्टदायक अनुभव था कि वे उस कश्मीर घाटी में लौटने की आस रख कर आंखों में सपना संजोए हुए हैं जहां अब उनका कोई अपना नहीं है।

तिल तिल मरने से अच्छा घर लौट आएं
हालाकि यह बात अलग है कि राज्य सरकार सामूहिक आवास का प्रबंध कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर भिजवाने की तैयारियों में जुटी है। माना कि कुछ कश्मीरी पंडित परिवारों का कश्मीर वापसी का अनुभव बुरा रहा हो या फिर शाम लाल धर जैसे लोग कश्मीर वापसी से इतराने लगे हों, मगर यह सच्चाई है कि इन अनुभवों के बाद भी कई कश्मीरी पंडित परिवार आज भी कश्मीर वापसी का सपना आंखों में संजोए हुए हैं और वे ऐसे हादसों को नजरअंदाज इसलिए करने के इच्छुक हैं क्योंकि उनकी सोच है कि तिलतिल मरने से अच्छा है कि अपने घर वापस लौट जाये।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top