15-15 सौ में खरीदे गवाह, राजस्थान और गुजरात वालों ने रजिस्ट्री करा ली अपने नाम

लैंड फ्रॉड और साइबर क्राइम मामलों की सुनवाई करतीं आईजी रिद्धिम अग्रवाल।

– कैंप कार्यालय में आईजी ने की समीक्षा तो सामने आए चौंकने वाले मामले

Cyber ​​and land fraud exposed, DDC : कुमाऊं में लैंड फ्रॉड और साइबर क्राइम के मामले चरम पर हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने कैंप कार्यालय में बैठकर पीड़ितों की सुनवाई की। एक मामले ने पैरों तले जमीन ही खिसका दी और यह मामला भी जमीन से ही जुड़ा है। हुआ यूं कि नैनीताल जिले में 13 नाली से अधिक जमीन की रजिस्ट्री उस व्यक्ति के नाम पर करा दी गई, जो मौजूद ही नहीं है।

जांच में सामने आया है कि रजिस्ट्री के लगाए गए सभी दस्तावेज फर्जी थे और जिन्होंने ये फर्जीवाड़ा किया वो राजस्थान और गुजरात के रहने वाले हैं। इन शातिरों ने जमीन खरीद में जिन गवाहों का इस्तेमाल किया, उन्हें 15-15 सौ रुपए में खरीदा गया था। ऐसे ही कई मामले साइबर फ्रॉड के भी आए और इन सभी पर अब आईजी ने सख्त रुख अपनाया है।

सुनवाई में इसी तरह कई मामले साइबर फ्रॉड के भी सामने आए। एक मामले में प्रकाश चन्द्र उप्रेती पुत्र स्व. धर्मानन्द उप्रेती निवासी नीलांचल कॉलोनी, डहरिया ने बताया कि वर्ष 2021 में उन्होंने दो ऑनलाइन बीमा पॉलिसी खरीदी। उन्होंने पॉलिसी की धनराशि निकालने का प्रयास किया। खुद को बीमा लोकपाल अधिकारी, हैदराबाद बताने वाले व्यक्ति ने उन्हें कॉल किया और विभिन्न बैंक खातों व यूपीआई के माध्यम से प्रकाश से 3,97,200 ठग लिए।

इसी तरह हर्षवर्धन कुमार शर्मा पुत्र कैलाश चन्द्र शर्मा निवासी तपस्या विहार कॉलोनी, गंगापुर रोड, ट्रांजिट कैम्प ऊधमसिंह नगर ने बताया कि उन्हें टेलीग्राम ऐप के जरिए शेयर मार्केटिंग से संबंधित एक लिंक भेजा गया और उनके साथ 9,57,000 की धोखाधड़ी कर ली गई।

आईजी ने बताया कि फर्जी रजिस्ट्री और बढ़ा-चढ़ाकर भूमि विक्रय करने वालों की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई होगी। साथ ही कहाकि साइबर फ्रॉड रोकने में युवाओं की भूमिका अहम है। उन्हें अपने लोगों को जागरुक करना चाहिए। उन्होंने पुलिस को ऐसे मामले में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिसके नाम कराई रजिस्ट्री उसका अस्तित्व ही नही
नैनीताल के थाना भवाली क्षेत्र स्थित बसगांव में 13 नाली 7 मुठ्ठी भूमि का बीते वर्ष 16 अगस्त को जनकिशन और मुरलीधर पुत्र हरिदत्त ने फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के जरिये से मोहन सिंह निवासी ग्राम छिपी के नाम रजिस्ट्री की गई। स्थानीय ग्रामवासियों ने आईजी को बताया कि उक्त नाम का कोई भी व्यक्ति ग्राम बसगांव या आसपास के क्षेत्र में रहता ही नहीं है। विवेचना में सामने आया कि रजिस्टार कार्यालय से प्राप्त आधार कार्ड का सत्यापन कराए जाने पर रिपोर्ट शून्य पाई गई। इसके अतिरिक्त रजिस्ट्री के दौरान लिखाए गए मोबाइल नंबरों की जांच में सामने कि उक्त नंबर से एक नंबर गुजरात तथा दूसरा राजस्थान राज्य से संबंधित है। गवाहों को भी 1500–1500 में खरीदा गया था।

15 साल बाद उजागर हुआ लैंड फ्रॉड
देवी दयाल पुत्र स्व. धनी राम निवासी बाजपुर ने वर्ष 2012 में ग्राम हरिपुरा, बाजपुर में लगभग ढाई एकड़, मौजा पडापुर में स्थित भूमि को अनिल चन्द सैन से खरीदी थी। दोनों पक्षों के बीच अच्छे संबंध होने के कारण अनिल चन्द सैन ने उक्त भूमि पर खेती का कार्य करता रहा और भूमि का दाखिल खारिज नहीं कराया गया। इसी दौरान वादी के पिता के निधन हो गया। जिसके बाद अनिल चन्द सैन ने उक्त भूमि को किसी अन्य व्यक्ति के नाम बेच दिया, जिससे भूमि संबंधी धोखाधड़ी का मामला प्रकाश में आया।

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