– एसडीएम ने की पड़ताल तो हुआ गड़बड़झाले का भंडाफोड़, कई प्रमाण पत्रों में तो ब्योरा भी अधूरा फिर भी मिल गया सर्टिफिकेट
Demographic changes in Uttarakhand, DDC : उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज के खुलासे में शर्मनाक और हैरान करने वाला भंडाफोड़ हुआ है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में प्रशासन की स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच में खुलासा हुआ कि आवेदक का आधार नंबर और मोबाइल नंबर ऐसा था, जो देश के प्रधानमंत्री के पास भी नहीं होगा। जांच में आधार का नंबर 1111111111 और मोबाइल नंबर 1111111111 है, जो असंभव है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी हेरफेर सामने दिखने के बावजूद आवेदक का स्थायी निवास प्रमाण बन गया। वहीं, शर्मनाक यह है कि यह आधार और मोबाइल नंबर कई आवेदनों में हैं, जिनके स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। यह सीधे विभागीय मिलीभगत का भंडाफोड़ करता है। फिलहाल जिला प्रशासन ने ऐसे स्थायी निवास प्रमाण पत्रों को निरस्त करने के लिए गठित कमेटी के पास भेज दिया है।
आयुक्त दीपक रावत ने बीती 14 नवंबर को सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ व फर्जीवाड़ा कर स्थायी निवास प्रमाण पत्र बनाने का भंडाफोड़ किया था। इसके बाद डीएम ललित मोहन रयाल ने पिछले पांच सालों में बने सभी स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है।
एसडीएम राहुल शाह ने रैंडमली 30 से 40 प्रमाण पत्रों की चेकिंग की तो वह दंग रह गए। एक आवेदन में आधार कार्ड नंबर 1111111111 था, वहीं मोबाइल नंबर भी 1111111111 था। इस पर उनका माथा ठनका और फिर उन्होंने एक के बाद एक कई प्रमाण पत्रों की जांच की तो कई में आधार नंबर व मोबाइल नंबर यही था।
इसके अलावा कई प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिसमें कई समितियों ने आवेदकों को जाति प्रमाणित की थी, किसी में निवास की सत्यता का शपथ पत्र दिया था। कई आवेदनों में सपोर्ट में लगाए गए बिजली-पानी के बिलों का आवेदक से कोई लेना देना नहीं था फिर भी बिल लगाए गए थे। कई आवेदनों में नाम भी स्पष्ट नहीं थे।
कई आवेदकों ने निवास की अवधि बाप-दादा के समय से बताई लेकिन संपत्ति का कोई ब्योरा नहीं था। किसी ने स्कूल से पांचवीं पास, किसी ने पार्षद या समिति से निवास का शपथ पत्र दिया गया था। ऐसे सभी प्रमाण पत्रों को निरस्तीकरण के लिए जिला प्रशासन की ओर से गठित कमेटी को भेजा जा रहा है।
अब तक 89 स्थायी निवास प्रमाण पत्र हो चुके हैं निरस्त
जिला प्रशासन ने स्थायी निवास प्रमाण पत्रों की जांच के पहले चरण में 48 और जांच के बाद दूसरे चरण में 41 प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए थे। अभी भी 300 से अधिक प्रमाण पत्र जांच के दायरे में हैं जिनमें 30 से 40 में तो यह फर्जीवाड़ा उजागर हो चुका है।
पटवारी से तहसीलदार, एसडीएम तक सब पर सवाल
स्थायी निवास प्रमाण पत्रों में इन आवेदनों में मिले फर्जीवाड़े ने सिर्फ डेमोग्राफी चेंज ही बल्कि पटवारी से तहसीलदार, एसडीएम को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि पटवारी ने सभी दस्तावेज तो दूर आधार कार्ड और मोबाइल नंबर जैसे बुनियादी डिटेल तक वेरिफाई नहीं की या जानबूझकर अनदेखी कर दिया। नियमानुसार तहसीलदार व एसडीएम को भी इन प्रमाण पत्रों को वेरिफाई करना चाहिए था, लेकिन इनके स्तर पर भी लापरवाही सामने आई। अब यह लापरवाही थी या अनदेखी, जांच के बाद ही पता चलेगा। यदि अनदेखी थी तो क्यों की गई, इस को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने बताया कि यह अत्यधिक गंभीर मसला है, इसकी गहन जांच कराई जाएगी। इस प्रकरण में जिन्होंने फर्जीवाड़ा किया है, इसके अलावा जिन्होंने आंख बंद करके यहां तक कि मोबाइल व आधार नंबर तक चेक नहीं किया है, ऐसे कर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

