– उत्तर गोवा जिले के अरपोरा क्षेत्र स्थित एक नाइट क्लब में लगी थी भीषण आग
Goa nightclub fire, DDC : गोवा के उत्तर गोवा जिले के अरपोरा क्षेत्र में स्थित एक नाइट क्लब में शनिवार देर रात भीषण आग लगने से 25 लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। यह हादसा राज्य के सबसे बड़े अग्निकांडों में से एक माना जा रहा है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार रात करीब 12 बजे क्लब में अचानक आग भड़क उठी। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे हॉल को अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर मौजूद लोग बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन क्लब में पर्याप्त आपातकालीन निकास द्वार (इमरजेंसी एग्जिट) न होने के कारण कई लोग अंदर ही फंस गए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आग इंडोर इलेक्ट्रानिक आतिशबाजी या ज्वलनशील सजावटी सामग्री के कारण भड़की। बताया गया कि क्लब के अंदर लकड़ी और ताड़ के पत्तों जैसी अत्यधिक ज्वलनशील सजावट थी, जिससे आग तेजी से फैल गई। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकांश लोगों की मौत झुलसने से अधिक दम घुटने के कारण हुई।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत-बचाव कार्य के दौरान क्लब से जले हुए शव और गंभीर रूप से घायल लोगों को बाहर निकाला गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है।
गोवा के मुख्यमंत्री ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने क्लब प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में फायर सेफ्टी मानकों के गंभीर उल्लंघन की बात सामने आई है। क्लब के मालिक और प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये तथा घायलों को पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
इस हादसे के बाद पूरे राज्य में नाइट क्लबों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों की फायर सेफ्टी ऑडिट की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन कराया गया होता, तो इतनी बड़ी जनहानि को टाला जा सकता था।
गोवा नाइट क्लब हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश के मनोरंजन स्थलों पर लोगों की जान की सुरक्षा को वास्तव में प्राथमिकता दी जा रही है।


