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आईटीआई के सवालों के जवाब के एवज में उद्यान विभाग ने मांगे लाखों रुपए।
10 रुपये के सवाल पर ढाई लाख का बिल! RTI जवाब के लिए उद्यान विभाग ने मांगे लाखों रुपये
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10 रुपये के सवाल पर ढाई लाख का बिल! RTI जवाब के लिए उद्यान विभाग ने मांगे लाखों रुपये

आईटीआई के सवालों के जवाब के एवज में उद्यान विभाग ने मांगे लाखों रुपए।

– हल्द्वानी के आरटीआई एक्टीविस्ट ने लगाई थी आरटीआई, जवाब के एवज में मांगे 2.60 लाख रुपये

Millions Demanded for RTI Reply, DDC : सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी पर उद्यान विभाग के जवाब ने पारदर्शिता के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हल्द्वानी निवासी RTI कार्यकर्ता हेमंत सिंह गौनिया ने उद्यान विभाग से पिछले 10 वर्षों के बजट, खर्च, योजनाओं, खरीद, ऑडिट और अनियमितताओं से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन विभागों ने सूचना उपलब्ध कराने के बजाय भारी-भरकम शुल्क की मांग कर दी।

हेमंत गौनिया ने यह आवेदन राज्य के सभी 13 जिलों के उद्यान अधिकारियों को भेजा था। अब तक केवल तीन जिलों — पिथौरागढ़, कोटद्वार (गढ़वाल) और उत्तरकाशी — से जवाब मिला है। तीनों जिलों ने सूचना देने के लिए हजारों पन्नों का हवाला देते हुए बड़ी रकम जमा कराने को कहा है।

पिथौरागढ़ उद्यान विभाग ने 4,941 पन्नों की कॉपी के लिए 9,882 रुपये मांगे हैं। वहीं कोटद्वार (गढ़वाल) ने 13,096 पन्नों के लिए 26,192 रुपये की मांग की है। सबसे चौंकाने वाला मामला उत्तरकाशी जिले से सामने आया, जहां विभाग ने 1,28,713 पृष्ठों का हवाला देकर 2,60,792 रुपये जमा कराने को कहा।

RTI कार्यकर्ता हेमंत गौनिया का आरोप है कि विभाग सूचना देने से बचने के लिए अत्यधिक शुल्क को हथियार बना रहा है। उनका कहना है कि विभागों ने न तो प्रश्न-उत्तर के रूप में जानकारी दी और न ही डिजिटल माध्यम जैसे ईमेल या सीडी के जरिए सूचना उपलब्ध कराने का विकल्प दिया।

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 30 दिनों के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। साथ ही कई जानकारियां पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होनी चाहिए। इसके बावजूद हजारों और लाखों पन्नों का हवाला देकर भारी शुल्क मांगना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

हेमंत गौनिया ने पूरे मामले में प्रथम अपील दायर कर सूचना निशुल्क उपलब्ध कराने और लगाए गए शुल्क को निरस्त करने की मांग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

“डिजिटल युग में भी विभाग ईमेल या सीडी के जरिए सूचना देने को तैयार नहीं है। भारी शुल्क मांगकर सूचना देने से बचने की कोशिश की जा रही है।” — हेमंत सिंह गौनिया, RTI कार्यकर्ता

 

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