– टांडा जंगल में फार्म वॉचर का मर्डर, दोस्त ने कुल्हाड़ी से काटी गर्दन, मरने वाला और हत्यारोपी थे दोस्त
Farm Watcher Murdered in Tanda Forest, DDC : टांडा जंगल में फार्म की निगरानी करने वाले दो दोस्तों के बीच शुक्रवार रात शराब पीने के बाद विवाद हो गया। नशे की हालत में पहले गाली-गलौज हुई और फिर दोनों ने हथियार उठा लिए। पहला शख्स हमला कर पाता, इससे पहले ही दूसरे ने कुल्हाड़ी के एक वार से गर्दन को लगभग धड़ से अलग कर दिया। घटना के बाद से फरार आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल आलाकत्ल भी बरामद कर लिया गया है। वन विभाग कर्मी की तहरीर पर पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
मूलरूप से अलीपुर, कौशांबी, प्रयागराज उत्तर प्रदेश निवासी मेवा लाल (50 वर्ष) रामपुर रोड स्थित टांडा जंगल में झोपड़ी बनाकर रहते थे। यह क्षेत्र भाखड़ा रेंज में आता है और झोपड़ी में मेवा के साथ तिलपुरी ललपुरी गूलरभोज गदरपुर, उधमसिंह नगर निवासी तिवारी सिंह (50 वर्ष) भी रहता था। दोनों वन विभाग के लिए फार्म वाचर का काम करते थे।
पिछले तीन सालों से साथ रहते-रहते दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई थी। दोनों साथ ही खाते-पीते थे। शुक्रवार रात भी दोनों साथ शराब पी, लेकिन नशे में होने के बाद उनके बीच झगड़ा हो गया। बात इतनी बढ़ी कि मेवा ने पाटल और तिवारी ने हाथ में कुल्हाड़ी उठा ली। इस वक्त रात के करीब 9 बज रहे थे। मेवा खुद को संभाल पाता, इससे पहले ही तिवारी ने मेवा के गले पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।
कुल्हाड़ी के एक ही वार से मेवा की गर्दन आधी से ज्यादा कट कर लटक गई। मेवा फौरन जमीन पर गिर गया और जमीन खून से लाल हो गई। यह देख तिवारी के हाथ-पैर फूल गए। कुल्हाड़ी के साथ तिवारी मौके से फरार हो गया। रात लगभग दो बजे सूचना मिली तो पुलिस मौके पर पहुंची। सुबह फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंच कर साक्ष्य जुटाए। अब तक कातिल अंजान था।
पुलिस की एक टीम वनाधिकारियों तक पहुंची तो पता लगा कि मरने वाला ठेके के तहत 12 हजार रुपए प्रतिमाह की नौकरी करता था। उसकी पांच बेटियां और एक बेटा है। यहां उसके साथ तिवारी सिंह रहता था। जिसके बाद पुलिस ने तिवारी की तलाश शुरू की। शनिवार को पुलिस ने तिवारी को मय कुल्हाड़ी के गिरफ्तार कर लिया। उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी तिवारी सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
जंगल में 5 किमी अंदर झोपड़ी, नेटवर्क तक नहीं आते
रामपुर रोड पर रेलवे क्रासिंग पर वन विभाग की चौकी है। इसी चौकी के बगल से एक कच्चा रास्ता जंगल की ओर जाता है। जंगल के भीतर वन विभाग पौधों का रोपण कराता है। इन्हीं पौधों को रोपने और उनकी देखरेख का काम मेवा और तिवारी मिलकर करते थे। पुलिस चौकी से करीब पांच किमी अंदर दोनों झोपड़ी बनाकर रहते थे। यह झोपड़ी जंगल में इतनी अंदर थी, जहां नेटवर्क तक आते थे। यही वजह थी कि पुलिस को सूचना भी वारदात के कई घंटे बाद मिली।
आरोपी को छोड़ गई बीवी, मां-बाप की हो चुकी है मौत
बताया जाता है तिवारी सिंह का अपना भरा पूरा परिवार था, लेकिन अब वह अकेला है। उसकी शादी भी हुई थी और कई सालों तक वह पत्नी के साथ रहा, लेकिन दोनों के बीच हमेशा विवाद होते रहते थे। इसी कारण तिवारी को उसकी पत्नी छोड़ कर चली गई और बाद में उसने तलाक दे दिया। इसके कुछ समय बाद तिवारी के माता-पिता की भी मौत हो गई। जब उसके आस-पास कोई नहीं बचा तो तिवारी ने भी मेवा की तरह वन विभाग में ठेके के तहत नौकरी शुरू कर दी।
सूनसान जंगल के बीच रोज जमती थी दोस्तों की महफिल
पुलिस का कहना है कि मेवा और तिवारी लंबे समय से साथ रह रहे थे। उनके बीच दोस्ताना माहौल बन चुका था। दोनों साथ में खाना बनाते और खाते थे। सूनसान जंगल में हाईवे से पांच किमी अंदर बनी झोपड़ी में दोनों लगभग रोजाना ही शराब पीते थे। पुलिस को घटना स्थल के बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें मिली हैं। पूछताछ में आरोपी ने भी इस बात को कुबूल किया है। साथ ही बताया है कि शराब पीने के बाद अक्सर दोनों के बीच कहासुनी हो जाती थी।

