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चंद्र ग्रहण 2025 : घोर संकट, आर्थिक तंगी, शरीरिक कष्ट और अपशय साया

– पूर्णिमा श्राद्ध तिथि (पितृ पक्ष) पर रहेगा चन्द्र ग्रहण का साया, पूरी दुनिया पर बुरा प्रभाव

Chandra Grahan 2025, DDC : चंद्र ग्रहण इस बार तमाम राशियों के लिए अशुभ खबर लाया है। पूर्णिमा तिथि से श्राद्ध (पितृ) पक्ष का प्रारंभ होता है इस वर्ष पूर्णिमा तिथि पर पूर्ण चंद्र ग्रहण होने के कारण अपराह्न 12:57 से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा, जिस कारण पूर्णिमा का उपवास नहीं रखा जाएगा, साथ ही जिन जातकों के पित्रों का श्राद्ध पूर्णिमा तिथि को होता है वह 12:57 से पूर्व ही श्राद्ध कर्म, तथा ब्रह्म भोज पूर्ण कर ले।

ज्योतिषाचार्य डॉ मंजू जोशी के मुताबिक, यह चंद्र ग्रहण भारत के अतिरिक्त यूरोप, अफ्रीका, एशिया, आस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों में देखा जाएगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और इसका सूतक भी मान्य होगा। भारतीय समयानुसार अपराह्न 12:57 से चन्द्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा।

ग्रहण का समय
चंद्र ग्रहण स्पर्श होगा 07 सितंबर 2025 रात्रि 09:57 पर, मध्य रहेगा रात्रि 11:42 पर और मोक्ष प्राप्त होगा अर्ध रात्रि 01:26 पर।

चंद्र ग्रहण पर कैसा रहेगा देश और दुनिया पर प्रभाव
7 सितंबर 2025 दिन रविवार को कुंभ राशि पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में ग्रहण लगेगा। चंद्रमा की युति राहु के साथ तथा सूर्य की युति केतु के साथ रहेगी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार यह अत्यंत अशुभ संयोग है जो कि देश और दुनिया में अनेक प्रकार की परेशानियों को जन्म देगी। वैश्विक राजनीति में उथल-पुथल रहेगी। अमेरिका तथा भारत के मध्य व्यापारिक असामान्यताएं रहेगी।

मध्य पूर्व व इजरायल के मध्य तनाव बढ़ेगा। अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही अनेक प्रकार के आर्थिक संकट भी देखने को मिलेंगे। साथ ही अनेक प्रकार से आम जनमानस के मध्य तनाव रहेगा।

आईए जानते हैं सभी 12 राशियों पर चंद्र ग्रहण का प्रभाव कैसा रहेगा
1–मेष राशि– मेष राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण शुभ फल कारक रहेगा धन लाभ होने के पूर्ण योग बन रहे हैं।

2–वृषभ राशि– वृषभ राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण अशुभ फलकारक रहेगा, शारीरिक पीड़ा तथा तनाव बढ़ सकता है।

3–मिथुन राशि– मिथुन राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण सामान्य फलकारक रहने वाला है परंतु संतान से संबंधित चिंता आपकी परेशानियां बढ़ा सकती है।

4–कर्क राशि– कर्क राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण शुभ फल कारक रहेगा। भौतिक सुख सुविधाओं में धन खर्च होगा तथा अनेक प्रकार से प्रसन्न रहेंगे।

5–सिंह राशि– सिंह राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण दांपत्य जीवन में अनेक प्रकार की परेशानियां उत्पन्न करेगा।

6–कन्या राशि– कन्या राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण अशुभ रहेगा शारीरिक कष्ट होने की अत्यधिक संभावनाएं रहेंगी।

7– तुला राशि– तुला राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण अपयश लेकर आएगा।

8–वृश्चिक राशि– वृश्चिक राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण पदोन्नति तथा संपन्नता प्रदान करने वाला रहेगा।

9–धनु राशि– धनु राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण शुभ फल कारक रहेगा, आकस्मिक धन लाभ होने की संभावना रहेगी।

10–मकर राशि– मकर राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण आय से अधिक व्यय के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न करेगा।

11–कुंभ राशि– कुंभ राशि के जातकों के लिए चंद्र ग्रहण शारीरिक कष्ट लेकर आएगा।

12–मीन राशि– मीन राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के कारण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।

क्या करें ग्रहण के दौरान
इसके अतिरिक्त जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो या चंद्रमा की युति राहु एवं केतु तथा शनि के साथ हो ऐसे सभी जातकों को चंद्र ग्रहण पर सफेद वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए, सफेद वस्त्र, चावल, चीनी, मिश्री, दूध, दही, मोती, चांदी, घी, दक्षिणा स्वेच्छा अनुसार दान करें तथा

इस मंत्र का 108 बार जाप करें–
ॐ सों सोमाय नम:।
ॐ चन्द्रमसे नमः।

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं सावधानी बरतें, धारदार हथियार न चलाएं सुई का प्रयोग ना करें और भोजन बनाने से परहेज करें। धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करें, ग्रहण के उपरांत स्नान के बाद ही भोजन ग्रहण करें।

आज का युग वैज्ञानिक युग कहा जाता है विज्ञान आज प्रगति की ओर है, आज का शिक्षित वर्ग विज्ञान को ही सत्य मानता है, परंतु वैदिक शास्त्र के द्वारा अति प्राचीन काल से ही सूर्य और चंद्र ग्रहण को महत्व दिया जाता रहा है। पूर्ण सूर्य और चंद्र ग्रहण के आरंभिक संकेत ऋग्वेद में है।

बृहतसंहिता से प्रकट होता है कि ग्रहण का वास्तविक कारण का भान भारतीय ज्योतिष शास्त्र एवम शास्त्रज्ञों को सैकड़ों वर्ष पूर्व ही हो गया था। सर्वप्रथम ऋषि अत्री, वराहमिहिर जोकि वेदों के प्रकांड विद्वान एवं खगोल शास्त्री थे। (ईसा की छठी शताब्दी का पूर्वार्ध का समय) ने  (वराहमिहिर) बृहतसंहिता में लिखा है। चंद्र ग्रहण में चंद्र पृथ्वी की छाया में आ जाता है। सूर्य ग्रहण में चंद्र सूर्य में प्रविष्ट हो जाता है।

यानी सूर्य एवं पृथ्वी के बीच में चंद्र आ जाता है। ग्रहण के कारणों को आरंभिक काल से ही हमारे ऋषि मुनि अपनी खोज एवं दिव्य दृष्टि से देख लेते थे इतने महान हैं हमारे वेद शास्त्र।

आधुनिकता की दौड़ में हम इतने दिशा विहीन हो गए हैं कि वेद शास्त्रों की महत्ता से विमुख हो रहे हैं। अतः वैदिक शास्त्रों की महत्ता को समझते हुए हम सभी सनातनी हिंदुओं को सनातन धर्म एवं वैदिक शास्त्रों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

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