नक्सलवाद को बड़ा झटका: कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा ढेर

– आंध्र प्रदेश के मारेदुमिल्ली जंगल में सुरक्षाबलों का सफल ऑपरेशन

Naxalite Madvi Hidma killed, DDC : आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू जिले के घने मारेदुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर देश के सबसे कुख्यात और सबसे वांछित नक्सली कमांडरों में से एक माडवी हिडमा को मार गिराया। मुठभेड़ में हिडमा के साथ उसकी पत्नी राजे (राजक्का) सहित कुल 6 नक्सली ढेर हुए। सुरक्षाबलों ने मौके से दो AK–47 राइफल, एक रिवॉल्वर और एक पिस्टल बरामद की।

गृह मंत्री ने सुरक्षाबलों की इस बड़ी सफलता की सराहना की है। इसे नक्सल-विरोधी अभियान में पिछले कई वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक माना जा रहा है।

कौन था माडवी हिडमा?

– माडवी हिडमा, जिसे संतोष, हिड्मालु जैसे नामों से भी जाना जाता था, छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ती गाँव का निवासी था।

– वह कम उम्र में ही नक्सल संगठन से जुड़ गया था और धीरे-धीरे संगठन में सबसे शक्तिशाली चेहरों में शामिल हो गया।

– वह PLGA बटालियन नंबर-1 का चीफ कमांडर था—माओवादी संगठन की सबसे खतरनाक और सक्रिय लड़ाकू टुकड़ी।

– हिडमा CPI (माओवादी) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में भी महत्वपूर्ण पद पर रहा, जिसने उसे रणनीतिक फैसलों और बड़े हमलों की योजना में सबसे ऊपर ला खड़ा किया।

– उस पर सुरक्षा बलों पर हुए 26 से अधिक बड़े हमलों की साजिश और नेतृत्व करने के आरोप थे।

– उसकी गिरफ्तारी या मौत पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

– हिडमा गुरिल्ला युद्ध, जंगल रणनीति और स्थानीय नेटवर्क खड़ा करने में माहिर माना जाता था। उसका प्रभाव छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना तक फैला हुआ था।

– उसकी पत्नी राजक्का भी माओवादी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती थी।

क्यों खास है हिडमा का खात्मा?

1. नक्सल आंदोलन को बड़ा नेतृत्व संकट

हिडमा माओवादी संगठनों की सैन्य शक्ति का मुख्य चेहरा था। उसके मारे जाने से नक्सलियों के संचालन और रणनीति पर बड़ा असर पड़ेगा।

2. बस्तर क्षेत्र में उसकी पकड़ बेहद मजबूत

हिडमा वर्षों से आदिवासी इलाकों में अपनी पकड़ बनाए हुए था। युवाओं को संगठन में शामिल कराने और गांवों पर नियंत्रण जमाए रखने में उसकी भूमिका अहम थी।

3. कई बड़े हमलों की साज़िश का अंत

हिडमा के नेतृत्व में किए जाते रहे हमलों की श्रृंखला अब टूट गई है। सुरक्षा एजेंसियां इसे “टर्निंग पॉइंट” मान रही हैं।

4. माओवादी क्षेत्रों में विकास प्रयासों को बढ़ावा

उसके जाने से जंगल इलाकों में सुरक्षा और विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

आगे की चुनौतियाँ

– विशेषज्ञों का मानना है कि हिडमा का खात्मा भले ही ऐतिहासिक सफलता हो, लेकिन नक्सलवाद की समस्या अभी खत्म नहीं हुई है।

– माओवादी संगठन उसके स्थान पर कोई नया कमांडर आगे कर सकता है।

– सुरक्षा बलों के साथ-साथ सरकार को विकास, शिक्षा और रोज़गार पर ध्यान जारी रखना होगा ताकि प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलवाद की जड़ें पूरी तरह कमजोर हों।

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