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डीएम का निजी स्कूलों पर एक्शन : मनमानी फीस पर चला डंडा, लौटानी होगी वसूली
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डीएम का निजी स्कूलों पर एक्शन : मनमानी फीस पर चला डंडा, लौटानी होगी वसूली

नैनीताल में निजी स्कूलों को लौटानी होगी अतिरिक्त फीस।

– तीन साल में सिर्फ 10% फीस बढ़ेगी, PTA की मंजूरी होगी अनिवार्य, नियम तोड़े तो 5 लाख तक जुर्माना, मान्यता और NOC पर भी संकट

DM Cracks Down on Private Schools, DDC : निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली पर आखिरकार जिला प्रशासन ने सख्त शिकंजा कस दिया है। अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बड़ा फैसला लेते हुए निजी स्कूलों के लिए फीस निर्धारण और वसूली के नए नियम लागू करा दिए हैं। अब स्कूल मनमाने तरीके से प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क या किसी अन्य नाम पर अतिरिक्त पैसा नहीं वसूल सकेंगे। जो अतिरिक्त राशि इस सत्र में वसूली जा चुकी है, उसे भी अभिभावकों को लौटाना होगा।

मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक और औचित्यपूर्ण खर्च के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण और परीक्षा शुल्क के अलावा अन्य सभी शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में रखा जाएगा, जिसकी मंजूरी अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) से लेना अनिवार्य होगी। किसी भी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी गई है।

प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य सरकार की एनओसी शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों में कुल अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे। इसके लिए भी PTA की स्वीकृति जरूरी होगी। बिना अनुमति फीस बढ़ाने को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

परीक्षाओं के नाम पर भी अब मनमानी नहीं चलेगी। पूरे सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक और एक वार्षिक परीक्षा आयोजित की जा सकेगी। बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षा ही होगी। उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क 600 रुपये से अधिक नहीं लिया जा सकेगा, जबकि ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) शुल्क केवल एक रुपये निर्धारित किया गया है।

अभिभावकों को एकमुश्त फीस जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही और वार्षिक भुगतान के विकल्प देने होंगे तथा प्रत्येक भुगतान की रसीद देना अनिवार्य होगा।

आदेश का सबसे अहम प्रावधान यह है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूली गई अतिरिक्त राशि का समायोजन एक जुलाई से देय शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त वसूली अधिक हुई है तो शेष राशि आगामी महीनों की फीस में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को सात दिन के भीतर इसका प्रमाणित विवरण शिक्षा विभाग को देना होगा।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी है कि आदेशों की अवहेलना करने वाले विद्यालयों पर शिक्षा का अधिकार अधिनियम और सीबीएसई उपविधियों के तहत एक लाख से पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा विद्यालय की मान्यता समाप्त करने, एनओसी निरस्त करने और अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।

प्रशासन की इस कार्रवाई को निजी स्कूलों की मनमानी पर अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक सख्ती माना जा रहा है। इससे जिले के हजारों अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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