जीवंत हो उठा गुजरा जमाना, सीआरपीएफ कैंप में मिले बिछड़े यार

– सीआरपीएफ कैंप काठगोदाम में “एक पड़ाव-अपनो से जुड़ाव” कार्यक्रम में मिले कभी सहपाठी रहे साथी

Ek padav-apnon se judav, DDC : एक कॉलेज से पढ़े और एक साथ पास हुए। कोई आज आर्मी और सीआरपीएफ में रहकर देश की सेवा कर रहा है, तो कोई अध्यापक बनकर देश के भविष्य को संवारने में जुटा है। वर्षों बाद से ये सारे दोस्त जब सीआरपीएफ कैंप काठगोदाम में मिले तो गुजरा जमाना जीवंत हो उठा। पुरानी यादों से जुड़ी चित्र प्रदर्शनी को देख ये दोस्त यादों में खो गए। फिर वो सीआरपीएफ सेक्टर उत्तराखंड के आईजी भानु प्रताप सिंह हो या फिर काठगोदाम कैंप के डीआईजी शंकर दत्त पांडे।

विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन ने कराया कार्यक्रम
शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई फाउंडेशन के तत्वावधान में “एक पड़ाव अपनों से जुड़ाव” कार्यक्रम का आयोजन सीआरपीएफ कैंप काठगोदाम में किया गया। लखनऊ विश्वविद्यालय एल्यूमिनाई का निरंतर प्रयास है कि विश्वविद्यालय से निकले पुरातन छात्रों, जो देश-विदेश में अपना सक्रिय और महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, उन्हें एक दूसरे से जोड़कर इस संगठन को पूर्णता प्रदान की जाए।

लगाई गई वृत्तचित्र और छाया चित्रों की प्रदर्शनी
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय कुलगीत से की गई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय से जुड़े वृत्तचित्र व छाया चित्रों का प्रदर्शन किया गया। इसे देखकर सभी की आंखों में गुजरा जमाना जीवंत हो उठा। कार्यक्रम में उत्तराखंड सेक्टर आईजी भानु प्रताप सिंह प्रमुख भूमिका में थे। इस दौरान पूर्व छात्र अनिल कांत द्विवेदी, पूर्व महामंत्री छात्रसंघ अनिल सिंह वीरू, पूर्व अन्तःवासी हबीबुल्लाह छात्रावास अश्वनी पांडे आदि ने अहम भूमिका निभाई।

आईएएस चंद्र मोहन बेरी को पहनाया अंगवस्त्र
आईएएस चंद्र मोहन बेरी (1961-66) को प्रतीक स्वरूप अंगवस्त्र व पौधा देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. लालता प्रसाद, कस्तूरी लाल तागड़ा, राजेश पांडे, मनोज तिवारी, सुरेंद्र सिंह, संजय दुबे, पंकज पाठक, सुधीर सिंह, नवीन कोहली, विजय चौबे, त्रिभुवन सिंह सजवान, राम सिंह बासौरा, एलडी गोहत्री, लेफ्टिनेंट कर्नल सुंनडीप सेन आदि थे। संचालन डॉ. अनूप भारती ने किया।

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