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सैलाब ला सकता है भीमताल डैम, रिटायर्मेंट के बाद भी कर रहा काम

– रिटायर हो चुके डैम का रिसाव रोकने को दो साल पहले हुए थे प्रयास, अब नया डैम बनाने की तैयारी में सरकार

Bhimtal Lake (Victoria Dam), DDC : उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित भीमताल झील यानी विक्टोरिया डैम कभी भी सैलाब ला सकता है। अपनी उम्र से 42 साल ज्यादा जी चुके इस ब्रिटिशकालीन डैम को दो साल पहले बचाने की कवायद भी की गई थी, क्योंकि पानी रोकने वाली डैम की दीवार से पानी का रिसाव शुरू हो गया था। लगभग 142 के हो चुके इस डैम की उम्र 42 साल पहले पूरी हो चुकी है। ऐसे में डैम कब खतरा बन जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसे देखते हुए अब नया भीमताल डैम बनाने की कवायद शुरू हो चुकी है।

100 साल की उम्र, 142 साल का हुआ डैम
भीमताल डैम को लेकर बुधवार को देहरादून में मैराथन बैठक हुई, जिसमें सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता संजय शुक्ल भी शामिल हुए। बता दें कि वर्ष 1983 में ब्रिटिशकाल में इस डैम का निर्माण कराया गया था और तब इंजीनियर्स ने इस डैम की उम्र 100 वर्ष घोषित की थी। जाहिर है इंजीनियर्स के कहे अनुसार डैम ने न सिर्फ अपनी पूरी उम्र जी बल्कि अब भी मैदानी क्षेत्रों को पीने और सिंचाई का पानी बिना रुके मुहैया करा रहा है। खास बात यह है कि डैम की उम्र अपनी निर्धारित उम्र से 42 वर्ष अधिक हो चुकी है यानी डैम 142 साल का हो चुका है। गुजरती उम्र के साथ अब यह इतना जीर्ण-शीर्ण हो चुका है कि कभी भी हादसे का सबब बन सकता है।

रिसाव तो बंद हुआ, लेकिन गारंटी नहीं
डैम की स्थिति को देखते हुए करीब डेढ़ साल पहले स्टडी वर्क फॉर स्टेबिलिटी ऑफ भीमताल डैम योजना के तहत अध्यन शुरू किया गया। अध्यन पर करीब 1.99 करोड़ रुपए खर्च किए गए। दिल्ली की फ्लड कॉन कंपनी ने ये अध्यन किया। जिसके बाद डैम की दीवार से हो रहे रिसाव को बंद तो कर दिया गया, लेकिन इस पर दावा नहीं किया जा सका कि अभी यह और कितने साल टिक सकता है। डैम की उम्र को देखते हुए अब नया डैम बनाने पर बैठकें शुरू हो चुकी हैं।

सिंचाई मंत्री ने मांगा नए डैम का प्रपोजल
बुधवार को सिंचाई मंत्री गणेश जोशी ने डैम को लेकर सचिव सिंचाई युगल किशोर पंत और सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता संजय शुक्ल के साथ बैठक की। तय किया गया कि नया भीमताल डैम बनाने की जरूरत है। इसको लेकर सिंचाई मंत्री गणेश जोशी ने अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। मुख्य अभियंता सिंचाई संजय शुक्ल का कहना है कि नया डैम बनाने के प्रोपजल पर काम शुरू कर दिया गया। जितनी जल्दी संभव हो, प्रपोजल सिंचाई मंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

142 साल पुरानी टेक्नोलॉजी, अब इस्तेमाल होगी मॉर्डन टेक्निक
मुख्य अभियंता संजय शुक्ल का कहना है कि ब्रिटिशकाल में बनाया यह एक चिनाई डैम है। इसकी चिनाई में पत्थर और चूने का इस्तेमाल किया गया था। भीमताल डैम का क्षेत्रफल 45.3 हेक्टेयर है। इसका जलागम क्षेत्र यानी केचमेंट एरिया 17.12 स्क्वायर किलोमीटर है जबकि डैम की स्टोरेज कैपेसिटी 4.59 मिलियन क्यूबिक मीटर है। अब जो नया डैम बनाया जाएगा, वो मॉडन तकनीक से तैयार किया जाएगा। जिसमें सिल्ट खुद-ब-खुद निकालने की क्षमता भी होगी और दीवारें कंकरीट की होंगी। दो दिन पूर्व ही सचिव सिंचाई, युगल किशोर पंत ने भी डैम का दौरा किया था।

राजा बाज बहादुर चंद ने की थी झील में बने मंदिर की स्थापना
भीमताल झील के लगभग किनारे पर भीमेश्वर महादेव मंदिर है। माना जाता है कि ये प्राचीन मंदिर महाभारत काल का है और लगभग 5000 साल पुराना है। 17वीं शताब्दी में राजा बाज बहादुर चंद ने इस मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया। कहा जाता है कि पांच पांडवों में से एक भीम एक बार यहां से गुजर रहे थे, तभी आकाशवाणी हुई। जिसके बाद उन्होंने अपनी गदा से प्रहार कर पहाड़ के बीच बड़ा गड्ढा बनाया, जो आज झील है और इस झील के किनारे उन्होंने शिवलिंग स्थापित किया। यह घटना तब हुई जब वह हिमालय की यात्रा पर अकेले ही निकल पड़े थे।

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