– आपदाग्रस्त लोगों की मदद के नाम पर राज्य में चल रहा चंदा जुटाने का खेल, नई-नई वेबसाइट से ठगी
Criminals are looking for opportunities in disaster, DDC : बरसात शुरू होते ही देवभूमि में बदल फटने की घटनाएं सामने आने लगीं और ये अभी भी जारी हैं। ताजा खबर देहरादून से आई है, जहां सहस्त्रधारा ने तबाही मचा दी। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में मौतें हुईं, लोग बेघर हो गए और इन्हीं बेघरों को फिर से बसाने के नाम पर साइबर क्रिमिनल लोगों को इमोशनल ब्लैकमेल कर “आपदा में अवसर” तलाश रहे हैं। इन बेघरों के नाम पर चंदा वसूला जा रहा है और लोगों की निजी जानकारी हासिल कर क्रिमिनल बैंक खाता खाली कर रहे हैं।
डिजिटल इंडिया में डिजिटल फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है और उत्तराखंड में आपदा के नाम पर साइबर क्रिमिनल ने ठगी का नया तरीका इजात कर लिया है। पिछले कुछ समय में ऐसे आधा दर्जन से ज्यादा मामले पुलिस तक पहुंचे, जिन्हें आपदा के नाम पर ठग लिया गया। ये सभी मामले कुमाऊं के विभिन्न जिलों से जुड़े हैं। ठगी के लिए साइबर क्रिमिनल ने कई वेबसाइट बनाई हैं।
वेबसाइट के जरिये लोगों तक लिंक के जरिये मैसेज भेजे जा रहे हैं और आपदा का शिकार हुए लोगों की मदद की अपील कर रहे हैं। तमाम लोग मदद के नाम पर अंजाने में अपना पैसा साइबर ठगों तक पहुंचा रहे हैं। जबकि साइबर ठग मदद के दौरान मदद करने वालों से उनके बैंक से जुड़ी सभी जानकारियां हासिल कर पूरा बैंक खाता ही खाली कर रहे हैं। साइबर टास्क फोर्स ने न सिर्फ ऐसी वेबसाइट बल्कि कुछ ऐप भी चिह्नित किए हैं, जिनसे ठगी की जा रही है।
केस 1:
धराली में आपदा के नाम पर मांगी मदद
पिथौरागढ़ निवासी मदन मोहन जोशी को उत्तरकाशी के धराली में आई आपदा के नाम पर 29 अगस्त को फोन आया। फोन करने वाले ने उन्हें एक लिंक भेजकर कहा कि इसमें डिटेल भरकर प्रभावितों के लिए चंदा जमा करने का कष्ट करें। जागरूक मदन मोहन ने तत्काल 1930 नंबर पर कॉलर के बारे में सूचना दी।
केस 2:
लालकुआं निवासी रुद्र लोहनी को अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने कहा कि चमोली के थराली में आपदा से प्रभावितों के लिए वह चंदा एकत्र कर रहे हैं। अज्ञात नंबर पर एक रुपया डालने को कहा। रुद्र ने एक रुपया डाल भी दिया। इसके बाद कॉलर ने एक ओटीपी मांगा, इस पर रुद्र पूरा मामला समझ गए और तुरंत फोन काट दिया।
हिमाचल और उत्तराखंड में तबाही, बिहार में ठगी
आपदा से हिमाचल और उत्तराखंड तबाह हो रहा है, लेकिन ठगा बिहार जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार में अगस्त माह में 20 हजार 547 लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपए निकाल लिए गए। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में बादल फटने और भू-स्खलन से हुई तबाही के नाम पर लोगों को शिकार बनाया गया। इसके अलावा बिहार के कुछ जिलों में आई बाढ़ के नाम पर भी चैरिटी एप और वेबसाइट बना कर ठगी की गई।
त्योहारों पर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं ठग
होली और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान साइबर ठग अधिक सक्रिय हो जाते हैं और लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपनाते हैं। ये ठग अक्सर डिस्काउंट ऑफर्स, कैशबैक और फ्री गिफ्ट वाउचर्स के बहाने लोगों को लुभाते हैं और उनकी व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर लेते हैं। कुछ महीने पहले ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर भी ठगी की राज्य में कोशिश की गई थी।
घटना के दूसरे दिन से हो जाते हैं सक्रिय
प्राकृतिक आपदा जहां होती है, उसके दूसरे दिन से ही साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं। वेबसाइट को संबंधित आपदा वाली जगह से जोड़ते हैं। उसमें उसी तरह से फोटो लगाते हैं। कुछ पीड़ित का वीडियो भी डालते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति आपदा प्रभावितों के लिए ऑनलाइन रुपयों का भुगतान करता है, उसके कुछ ही देर में उसके खाते से सारे पैसे निकल जाते हैं।
आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल का कहना है कि वर्तमान में साइबर अपराध से लड़ना बड़ी चुनौती है। त्योहारों, विशेष अवसरों के बाद अब आपदा में भी अपराधी अवसर खोज रहे हैं। लोगों को फर्जी लिंक या वेबसाइट की जानकारी भेजकर खाता खाली करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों को जागरूक रहना होगा, तभी साइबर अपराध से निपटा जा सकेगा।


