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40 साल बाद मिला जाबांजी का इनाम, झेली थी दुश्मनों की 13 गोली

जवान तेज सिंह मेहता को सम्मानित करतेआसाम राइफल्स के सहायक कमांडेंट सुदीप लामा व अन्य।

. असम राइफल्स के आतंकवाद विरोधी अभियान का थे हिस्सा, 1984 में नागालैंड में घात लगाकर दुश्मनों ने किया था हमला

The reward for his bravery came after 40 years, DDC : देश के लिए जान दांव पर लगाने वाले जांबाजों को असम राइफल्स कभी नहीं भूलती। ऐसे ही एक जांबाज के बारे में जब असम राइफल्स के अधिकारियों को पता लगा तो वह हल्द्वानी पहुंचे। दुश्मनों की 13 गोलियां खाने वाले इस सेवानिवृत्त नायक तेज सिंह मेहता को उनके घर पर पहुंच कर सम्मानित किया। वीरता के लिए यह सम्मान मेहता को 40 साल बाद मिला।

गुरुवार को सेवानिवृत्त नायक तेज सिंह मेहता के कठघरिया स्थित घर पहुंचे असम राइफल्स के सहायक कमांडेंट सुदीप लामा ने बताया कि वर्ष 1984 में तेज सिंह मेहता राइफल्स में नायक के पद पर तैनात थे। तब असम राइफल्स की पूर्वोत्तर में गहरी जड़ें थीं और वो आतंकवाद के खिलाफ नागालैंड में बड़ा ऑपरेशन चला रही थी।

1984 में नागालैंड में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान तेज सिंह मेहता एक घात लगाकर किए गए हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके बाएं पैर में 12 और दाएं पैर में एक गोली लगी थी। इन चोटों के कारण उनके बाएं पैर का निचला हिस्सा काटना पड़ा था।

डीजी लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा के निर्देश पर कंपनी के ऐसे जवानों का समय-समय पर हाल लिया जाता है, जिन्होंने अपनी वीरता से कंपनी और देश का सम्मान बचाया है। तेज सिंह मेहता के बारे में उन्हें पिछले साल तब जानकारी मिली, जब असम रायफल ने जवान तेज प्रताप का सम्मान किया। तेज प्रताप ने तेज सिंह मेहता के बारे में बताया।

जिसके बाद जनरल विकास लखेरा कंपनी के निर्देश पर तेज सिंह मेहता के घर पहुंचे और उनके अदम्य साहस के लिए उन्हें सम्मानित किया और सम्मान स्वरूप दो लाख रुपए का चेक सौंपा। उन्होंने कहा, आसाम राइफल्स भारत का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल और अपने सैनिकों की वीरता का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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