- तीन दिन में खरीदार को प्लॉट दिलाने के निर्देश, धोखाधड़ी की पुष्टि पर प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
DDC : जमीन खरीदने के नौ साल बाद जब ममता मेहरा भवन निर्माण कराने पहुंचीं तो पता चला कि जिस प्लॉट की चहारदीवारी उन्होंने बनवाई थी, वह किसी और का हो चुका है। जांच में सामने आया कि प्लॉट बेचने वाले ने उसी जमीन को दोबारा बेच दिया। आरोप है कि प्रॉपर्टी डीलर ने कॉलोनी की सड़क तक बेच डाली। मामला मंडलायुक्त दीपक रावत की जनसुनवाई में पहुंचा तो उन्होंने खरीदार और विक्रेता अनिकेत भट्ट को तलब कर तीन दिन के भीतर ममता मेहरा को प्लॉट दिलाने के निर्देश दिए। जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर संबंधित भू-स्वामी के खिलाफ लैंड फ्रॉड एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई है।
ममता मेहरा ने जनसुनवाई में बताया कि उन्होंने वर्ष 2015 में फतेहपुर स्थित चारधाम मंदिर क्षेत्र में एक प्लॉट खरीदा था। जमीन की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी भी बनवा दी थी। वर्ष 2024 में जब वह भवन निर्माण कराने पहुंचीं तो पता चला कि संबंधित प्लॉट पर किसी दूसरे व्यक्ति का दावा है। मामले की पड़ताल में सामने आया कि प्लॉट बेचने वाले ने कॉलोनी के सभी प्लॉट बेच दिए थे। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कॉलोनी की सड़क भी बेच दी गई, जिससे वहां जमीन का विवाद और उलझ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलायुक्त ने खरीदार और विक्रेता को कार्यालय में बुलाया। दोनों पक्षों के बीच समाधान की प्रक्रिया के बाद तीन दिन के भीतर ममता मेहरा को प्लॉट दिलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्पष्ट किया कि जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जमीन खरीदकर छोड़ न दें खाली
मंडलायुक्त दीपक रावत ने लोगों से अपील की कि जमीन खरीदने के बाद उसके स्वामित्व और दस्तावेजों की स्थिति की जांच करें। भूमि की चहारदीवारी कराने के साथ ही यथासंभव शीघ्र निर्माण भी कराएं, ताकि भविष्य में विवाद और कब्जे जैसी परेशानियों से बचा जा सके।
जनसुनवाई में पारिवारिक विवाद, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों में संशोधन, सड़क निर्माण और स्थायी परमिट से संबंधित शिकायतें भी सुनी गईं। संबंधित अधिकारियों को मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए गए।
वन विभाग की आपत्ति से रुकी विजयपुर की सड़क
गौलापार के विजयपुर गांव के लोगों ने पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य अर्जुन बिष्ट के साथ मंडलायुक्त के सामने सड़क निर्माण का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि सूखी नदी पर काजवे के साथ करीब दो किलोमीटर सड़क निर्माण को शासन से मंजूरी मिली थी। लोक निर्माण विभाग ने काम शुरू किया, लेकिन वन विभाग की आपत्तियों के चलते निर्माण आगे नहीं बढ़ सका।
मंडलायुक्त ने लोक निर्माण विभाग और वन विभाग के अधिकारियों को तलब कर मामले की जानकारी ली। बताया गया कि सड़क निर्माण से संबंधित धनराशि वन विभाग को उपलब्ध नहीं कराई जा सकी थी। इस पर मंडलायुक्त ने शासन को धनराशि जारी करने के लिए पत्र भेजने और विजयपुर गांव के सड़क मार्ग का निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ समस्या का समाधान करने को कहा।


