– वीडियो में जितने भी नाम लिए अधिकांश पर मुकदमा, लेकिन पुलिस अधिकारी और कर्मियों पर नहीं हुई एफआईआर
Sukhwant Singh suicide case, DDC : ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जनपद में सक्रिय कथित प्रॉपर्टी डीलर नेटवर्क की धोखाधड़ी ने किसान सुखवंत सिंह की जान ले ली। करोड़ों रुपये की ठगी, बार-बार रजिस्ट्री से इंकार और लगातार मानसिक प्रताड़ना से टूटे सुखवंत ने हल्द्वानी के गौलापार स्थित देवभूमि होटल में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। मृतक के भाई ने कोतवाली आईटीआई में दी गई तहरीर में 25 से अधिक लोगों को इस मौत का जिम्मेदार ठहराया है। आईटीआई थाना पुलिस ने मामले में सभी आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर लिया है, बजाय उन पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के, जिनके नाम सुखवंत ने मौत से ठीक पहले बनाए वीडियो में लिए थे।
वादी के अनुसार, उसके भाई सुखवंत सिंह और उसने बक्सौरा कुंडा क्षेत्र में 6.84 एकड़ भूमि खरीदने का सौदा किया था। शुरुआत में जमीन मालिक बलवंत सिंह उर्फ काला ने बताया कि भूमि आगे प्रॉपर्टी डीलरों—अमरजीत सिंह, आशीष चौहान उर्फ पटवारी और कुलविंदर सिंह को बेच दी गई है और सौदा उन्हीं से करने को कहा गया।
इसके बाद 34 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से कुल 6.84 एकड़ भूमि का सौदा तय हुआ। वादी पक्ष के अनुसार रजिस्ट्री के दिन 50 लाख रुपये देने की बात थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं कराई गई। महीनों तक चक्कर कटवाए गए, लेकिन न तो रजिस्ट्री हुई और न ही रकम लौटाई गई।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस पूरे सौदे के दौरान प्रॉपर्टी डीलरों के खातों में 1 करोड़ 2 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि नकद कुल 2 करोड़ 80 लाख रुपये दिए गए। इस प्रकार कुल 3 करोड़ 82 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी की गई।
मामला सुलझाने के लिए रिश्तेदार को आगे किया गया, लेकिन आरोप है कि उसने भी विपक्षियों से मिलकर बाजपुर रोड पर एक अन्य प्लॉट का सौदा 4 करोड़ 5 लाख रुपये में करा दिया, जिससे स्थिति और उलझ गई। लगातार दबाव, अपमान और आर्थिक तबाही से टूटकर सुखवंत सिंह गहरे अवसाद में चले गए।
10 जनवरी 2026 की रात, हल्द्वानी स्थित देवभूमि होटल के कमरा नंबर 101 में सुखवंत सिंह ने कनपटी में गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
वादी ने अपनी तहरीर में अमरजीत सिंह, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, आशीष चौहान, उनके परिजन, कई प्रॉपर्टी डीलर, जमीन मालिक और अन्य सहयोगियों सहित कुल 25 से अधिक नामजद लोगों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
तहरीर में साफ कहा गया है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि संगठित धोखाधड़ी, मानसिक उत्पीड़न और सिस्टम की चूक का परिणाम है।
मामले में अब सवाल सिर्फ एक एफआईआर का नहीं, बल्कि यह भी है कि
करोड़ों के लेन-देन पर रजिस्ट्री क्यों नहीं हुई?
नकद भुगतान कैसे और किनकी मौजूदगी में हुआ?
इतने बड़े नेटवर्क पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इन आरोपियों पर दर्ज हुआ मुकदमा
1. अमरजीत सिंह
2. दिव्या
3. रविंद्र कौर
4. लवप्रीत कौर
5. कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी
6. हरदीप कौर
7. आशीष चौहान उर्फ पटवारी
8. आशीष चौहान की पत्नी
9. गिरवर सिंह
10. महीपाल सिंह
11. शिवेन्द्र सिंह
12. विमल
13. विमल की पत्नी
14. देवेन्द्र
15. राजेन्द्र
16. गुरप्रेम सिंह
17. जगपाल सिंह
18. जगवीर राय
19. मनप्रीत कलसी
20. अमित
21. मोहित
22. सुखवंत सिंह पन्नू
23. वीरपाल सिंह पन्नू
24. बलवंत सिंह बक्सौरा
25. बिजेन्द्र
26. पूजा
27. जहीर (गड्ढा कॉलोनी
मानसिक उत्पीड़न से टूटा, सिस्टम से हारकर दी जान
वादी का आरोप है कि लगातार धमकी, टालमटोल, आर्थिक बर्बादी और पुलिस की निष्क्रियता ने सुखवंत सिंह को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया। तहरीर में साफ लिखा है कि यह मौत आत्महत्या के लिए उकसाने, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का परिणाम है।
घटना के बाद पुलिस-प्रशासन पर सवालों की बौछार
1. फेसबुक लाइव के बावजूद समय रहते युवक को क्यों नहीं रोका गया?
2. जिन पर मिलीभगत के आरोप लगे, उनकी भूमिका की जांच कौन करेगा?
3. करोड़ों के लेन-देन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

