. 8 अगस्त को रामलीला मैदान में थी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, 10 अगस्त को हुआ था कथित शुद्धिकरण हवन
DDC : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के हल्द्वानी दौरे के दौरान आयोजित कार्यक्रम स्थल रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोतवाली हल्द्वानी में दर्ज एफआईआर में अज्ञात के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अंजू की ओर से दी गई थी।
एफआईआर के मुताबिक आठ अगस्त को कांग्रेस की ओर से रामलीला मैदान में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शामिल हुए थे। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को कुछ लोगों द्वारा इसी कार्यक्रम स्थल का कथित रूप से ‘शुद्धीकरण’ किए जाने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि इस कथित कार्यक्रम को सार्वजनिक रूप से किया गया और इससे संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो की एडिटिंग भी जांच के दायरे में
पुलिस को दी गई शिकायत में वायरल वीडियो की वास्तविकता की जांच कराने की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई कि वीडियो के साथ काट-छांट या एडिटिंग की गई हो सकती है। एफआईआर में पुलिस से वीडियो के मूल स्रोत, उसमें वास्तविक रूप से क्या कहा गया था और उसे किस व्यक्ति ने एडिट कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया, इसकी जांच करने को कहा गया है।
पुलिस ने वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हुई पोस्ट, कमेंट और अन्य डिजिटल सामग्री को सुरक्षित करने तथा संबंधित मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की नियमानुसार जांच करने की बात दर्ज की है। फोरेंसिक/डिजिटल जांच के जरिये यह भी निर्धारित किया जाना है कि वायरल वीडियो में किसी तरह की काट-छांट, एडिटिंग या छेड़छाड़ हुई है अथवा नहीं।
‘अल्लाह-हु-अकबर’ के नारे का भी जिक्र
शिकायत में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उसमें ‘अल्लाह हु अकबर’ जैसे धार्मिक नारों को कथित तौर पर आपत्तिजनक एवं आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इससे एक विशेष धार्मिक समुदाय के प्रति गलत धारणा, घृणा और वैमनस्य पैदा करने का प्रयास किया गया। हालांकि, एफआईआर में आरोपी के तौर पर किसी व्यक्ति का नाम दर्ज नहीं है। पुलिस ने एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले की विवेचना निरीक्षक विजय सिंह मेहता को सौंपी गई है।
जातिगत अपमान और सामाजिक वैमनस्य का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक स्थान पर किए गए कथित ‘शुद्धीकरण’ से अनुसूचित जाति के व्यक्ति के प्रति जातिगत भेदभाव, सामाजिक अपमान और घृणा की भावना पैदा करने वाला कृत्य हुआ। इसी आधार पर एससी/एसटी एक्ट की धारा के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस अब यह पता लगाएगी कि 10 अगस्त को रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धीकरण’ कार्यक्रम में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसकी अगुवाई किसने की और सोशल मीडिया पर वीडियो किसने तैयार अथवा प्रसारित किया। साथ ही वीडियो की मूल फुटेज हासिल कर उसकी डिजिटल जांच कराई जाएगी।
एफआईआर में पुलिस के सामने ये बड़े सवाल
– 10 अगस्त को रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धीकरण’ किसने कराया?
– कार्यक्रम में कौन-कौन लोग मौजूद थे?
– वायरल वीडियो की मूल रिकॉर्डिंग क्या है?
– वीडियो में कोई काट-छांट या एडिटिंग हुई है या नहीं?
– वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर किस अकाउंट से पहली बार प्रसारित हुए?
– कथित कृत्य में एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लागू होती हैं या नहीं?
नेता प्रतिपक्ष ने अंजू की शिकायत पर एसएसपी से किया था सवाल
खरगे की सभा के बाद लगभग पूरा विपक्ष एसएसपी कार्यालय में यह आरोप लगाते हुए घुस गया था कि पुलिस ने जानबूझकर उनके कार्यकर्ताओं को घटना स्थल तक नहीं पहुंचने दिया। इसके बाद राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज हुआ तो कांग्रेसी और मुखर हो गए। इसी के बाद अंजू ने पुलिस को तहरीर सौंपी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। इससे नाराज नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, कांग्रेस जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल, विधायक सुमित हृदयेश समेत तमाम कांग्रेसी पुलिस बहुउद्देशीय भवन पहुंच गए और इसमें अंजू भी थी। नेता प्रतिपक्ष ने यहीं एसएसपी डॉ.मंजूनाथ टीसी से एफआईआर न करने की वजह पर सवाल किया था। तब एसएसपी ने वक्त मांगते हुए जांच की बात कही थी।

