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बैंक डिफाल्टर मुकेश बोरा को मिल चुका है तीन माह का कारावास

मुकेश बोरा की जमानत याचिका खारिज।

– वर्ष 2014 में चेक बाउंस के मामले में अदालत ने दी थी सजा, कार लोन न नहीं लौटाया था नैनीताल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक का पैसा

Exploits of Mukesh Bora, DDC : दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होते ही नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा के पुराने कारनामे एक-एक कर बाहर आने लगे हैं। पहला मामला 138एनआई एक्ट का था। जिसमें उसे तीन माह की सजा हुई थी। एक अन्य मामले में नैनीताल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक मुकेश बोरा को कार लोन न चुकाने पर डिफाल्टर घोषित किया था ।

किराए पर लेकर वाहन नहीं चुकाया पैसा
138 एनआई एक्ट का ये मामला नौ साल पुराना है। धारी के धीरेंद्र सिंह ने वर्ष 2014 में यह वाद दायर किया था। आरोप था कि मुकेश बोरा ने दूध सप्लाई के लिए उनका वाहन 35 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से लिया था। वर्ष 2012 मार्च से नवंबर 2013 तक मुकेश बोरा ने वाहन का उपयोग किया और फिर छोड़ दिया। नवंबर तक वाहन का किराया साढ़े तीन लाख हो चुका था। इसके एवज में मुकेश ने 19 मार्च 2014 को एक चेक डेढ़ लाख रुपये का और दूसरा चेक दो लाख रुपये का दिया।

दो चेक दिए और दोनों हो गए बाउंस
15 मई 2014 और 13 जून 2014 को दोनों चेक बाउंस हो गए। इस मामले में दायर वाद में न्यायालय द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मुकेश बोरा को दोषी मानते हुए तीन माह का कारावास, 3.75 लाख रुपये जुर्माना, इसमें से 3.65 लाख रुपये पीड़ित को देने व 10 हजार रुपये राज्य पक्ष में जमा करने के आदेश दिए थे।

फिर बैंक ने घोषित कर दिया डिफाल्टर
इस मामले के बाद मुकेश बोरा फिर विवाद में आए। उन्होंने वर्ष 2012 में नैनीताल डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के प्रधान कार्यालय हल्द्वानी से कार खरीदने के लिए 6,65,827 लाख रुपये का लोन लिया था । लोन वर्ष 2016 तक चुकता करना था, जो मुकेश बोरा नहीं किया। जिसके बाद बैंक ने मुकेश बोरा को डिफाल्टर घोषित कर दिया था।

मुकेश बोरा के कार्यकाल में ये लगे थे आरोप
– हजारों लीटर अधोमानक दूध खरीदने का मामला सामने आया।
– राजस्थान से एक ही टैंकर से तीन दिन लगातार दूध आने का मामला सामने आया।
– एजीएम के लिए पश्मीना रजाई और कंबल खरीदे गए। इसकी जांच में घोटाला सामने आया।
– साढें पांच साल के कार्यकाल में पांच जीएम बदलना बना चर्चा का विषय।
– नैनीताल दुग्ध संघ ने पहली बार आठ करोड़ की बैंक से लिमिट बनाकर पैसा कर्ज लिया।
– दूध ढुलाई में लगे वाहनों के भाड़े में बेहताशा वृद्धि की।
– रिश्तेदारों को दुग्ध संघ में लगाने का लगा आरोप।
– मैन पावर के ठेके अपने लोगों को देने के ​लगे आरोप।

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