– इंसान और पशु के बीच यौन शोषण : इतिहास से लेकर आंकड़े तक
Rape by dogs and cats, DDC : भारत में पशुओं के यौन शोषण के मामले दुर्लभ नहीं हैं। हालांकि, इन अपराधों के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन विभिन्न रिपोर्टों और घटनाओं से यह स्पष्ट है कि यह एक गंभीर और बढ़ती हुई समस्या है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एनीमल प्रोटेक्शन ऑर्गनाइजेशंस (FIAPO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2020 के बीच भारत में कुल 4,93,910 पशुओं के साथ अपराध किए गए। इनमें से 720 मामले सड़क पर रहने वाले जानवरों, 741 कार्यरत जानवरों, 588 पालतू जानवरों, 88 फार्म जानवरों और 258 जंगली जानवरों और पक्षियों के थे।
PETA इंडिया के अनुसार, हर आठवां पशु क्रूरता का मामला यौन शोषण या बलात्कार से संबंधित होता है। 2014 में, ‘वॉयस ऑफ स्ट्रे डॉग्स’ की रिपोर्ट में 33 मामले सामने आए थे, जिनमें पुरुषों ने कुत्तों, गायों और अन्य जानवरों के साथ यौन शोषण किया था। हाल ही में, असम के मोरीगांव जिले में एक व्यक्ति को एक लैब्राडोर कुत्ते के साथ यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के माध्यम से उजागर हुई।
इतिहास और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
– प्राचीन सभ्यताओं (ग्रीस, रोम, मिस्र) में bestiality का ज़िक्र मिथकों और साहित्य में मिलता है।
– धर्मग्रंथों (बाइबिल, कुरान, वेद) में इसे “पाप” और “अधर्म” माना गया।
– मध्ययुगीन यूरोप : ऐसे अपराध पर मौत की सज़ा तक दी जाती थी (इंसान और पशु दोनों को मार देते थे)।
भारत में कानूनी स्थिति
– IPC 377 (ब्रिटिश काल) में इसे अपराध माना गया था।
– 2018 में LGBT अधिकारों हेतु 377 हटाया गया, पर bestiality अपराध ही रहा।
– 2023 में नया भारतीय न्याय संहिता (BNS) आया, जिसमें यह अपराध स्पष्ट रूप से शामिल नहीं है यानी कानूनी खालीपन।
दुनिया में कानूनी स्थिति
– अमेरिका, कनाडा, यूके, जर्मनी, स्वीडन आदि में यह गंभीर अपराध है।
– कई जगह 10–20 साल की सज़ा तक हो सकती है।
मनोवैज्ञानिक पहलू
– इसे zoophilia कहा जाता है, और यह paraphilia (यौन विकृति) की श्रेणी है।
कारण
– बचपन का यौन शोषण
– अकेलापन, सामाजिक अलगाव
– मानसिक विकार (antisocial personality, paraphilic disorder)
– अमेरिका और यूरोप के अध्ययन बताते हैं कि ऐसे अपराधियों का बच्चों और पशुओं दोनों के शोषण से संबंध पाया जाता है।
भारत में केस और आंकड़े
– 2010–2020 (FIAPO रिपोर्ट)
– कुल पशु अपराध 4,93,910
– इनमें से 82 मामले यौन शोषण से जुड़े थे (8–9 केस हर साल)।
– 2016 (चेन्नई) : 2009–15 के बीच 25 केस दर्ज हुए।
– 2019 (चेन्नई) : 9 वर्षों में 6 शिकायतें, लेकिन 2 महीने में 2 नए केस।
हाल के बड़े मामले (2025)
– असम, मोरिगाँव में व्यक्ति को लैब्राडोर कुत्ते से यौन शोषण पर गिरफ्तार किया गया।
– नागपुर में घुड़सवारी अकादमी में कर्मचारी ने घोड़ी से शोषण किया, CCTV में पकड़ा गया।
– दिल्ली, शाहदरा (2025) में जल-आपूर्ति कर्मचारी को आवारा कुत्ते के साथ यौन शोषण पर पकड़ा गया।
– मैसूरु (2021) में 19 वर्षीय युवक को कुत्ते से संबंध बनाते पकड़ा गया।
विश्व में केस और आंकड़े
– यूके अध्ययन (2001) में छोटे पशुओं के 448 केस में से 6% यौन शोषण के थे (21 कुत्ते, 5 बिल्लियाँ, 2 अन्य)।
– अमेरिका (1975–2015) के 456 गिरफ्तारियां bestiality में।
– इनमें से 52.9% अपराधियों का अन्य अपराधी रिकॉर्ड भी था।
– सिर्फ 39.1% मामलों में मुकदमा चला।
– वर्जीनिया (SVPs अध्ययन)
– 1,248 खतरनाक यौन अपराधियों में से 2.6%* bestiality में शामिल पाए गए।
पशु-अधिकार दृष्टिकोण
– PETA और FIAPO का मानना है कि यह जानवरों पर क्रूरता है।
– PCA Act, 1960 में जुर्माना बेहद कम है (₹50–₹100)।
– NGOs मांग कर रहे हैं कि इसे गंभीर अपराध (non-bailable offence) घोषित किया जाए।
खतरे और परिणाम
जानवर के लिए : शारीरिक चोट, संक्रमण, मृत्यु तक।
इंसान के लिए : zoonotic diseases (रेबीज़, परजीवी संक्रमण आदि)। सामाजिक बहिष्कार, जेल की सजा।

