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राज्य कर अधिकारी उम्मेद बाइज्जत बरी, ‘रिश्वतखोर’ कर्मचारी पर चलेगा मुकदमा

– सह-अभियुक्त के बयान पर भरोसा नहीं, कोर्ट ने राज्य कर अधिकारी को बरी किया, रंगेहाथ पकड़े गए कर्मचारी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज

State Tax Officer acquitted, DDC : विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सविता चमोली की अदालत ने भ्रष्टाचार के एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए एक अधिकारी को बरी कर दिया है। अदालत ने राज्य कर अधिकारी उम्मेद सिंह बिष्ट को आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया, जबकि सह-अभियुक्त और जीएसटी मामलों का काम देखने वाले कर्मचारी दीपक मेहता की उन्मोचन अर्जी खारिज कर दी। मेहता के खिलाफ अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत औपचारिक रूप से आरोप तय होंगे।

विस्तृत आदेश में उम्मेद सिंह बिष्ट को बरी करने के पीछे मुख्य कारण यह बताया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध के लिए आवश्यक तत्व – रिश्वत की मांग और उसकी स्वीकृति का कोई ठोस, प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य साक्ष्य पेश नहीं कर पाया।

न्यायाधीश ने कहा कि बिष्ट के पास शिकायतकर्ता की जीएसटी फाइल लंबित थी, लेकिन केवल फाइल लंबित होने से भ्रष्टाचार का अपराध गठित नहीं होता, जब तक कि रिश्वत की मांग साबित न हो। इसके अलावा, बिष्ट के खिलाफ संलिप्तता का एकमात्र आधार सह-अभियुक्त दीपक मेहता का पुलिस हिरासत में दिया गया बयान था।

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस को दिया गया ऐसा इकबालिया बयान साक्ष्य के रूप में अग्राह्य है और किसी अन्य अभियुक्त के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। यहां तक कि विजिलेंस की प्रारंभिक गोपनीय जांच में भी बिष्ट का नाम नहीं आया था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए, न्यायालय ने पाया कि बिष्ट के खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं है, और उन्हें बरी किया जाता है।

दीपक मेहता पर मुकदमा चलेगा, रंगेहाथों की गिरफ्तारी
इसके विपरीत, न्यायालय ने कर्मचारी दीपक मेहता की उन्मोचन अर्जी को खारिज कर दिया क्योंकि उनके खिलाफ प्रथम दृष्ट्या पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता मनोज जोशी से ₹3,000/- की रिश्वत लेते हुए दीपक मेहता को रंगेहाथों गिरफ्तार किया था। अभियोजन पक्ष ने रिश्वत के नोटों की बरामदगी, उन पर लगे फिलोपथीन पाउडर का साक्ष्य और सोडियम कार्बोनेट घोल में हाथ धोने पर घोल का गुलाबी रंग हो जाने जैसे ट्रेप से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए हैं।

मेहता के वकील द्वारा ‘विलंब से प्राप्त अभियोजन स्वीकृति’ की वैधता पर उठाए गए सवाल को अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अभियोजन चलाने की अनुमति प्राप्त हो चुकी है और इसकी वैधता पर किसी भी आपत्ति के बाद निर्णय के स्तर पर ही तय की जाएगी, न कि आरोप तय करने के स्तर पर। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने पाया कि दीपक मेहता के विरुद्ध धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) का आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार है। अदालत ने आदेश दिया कि उम्मेद सिंह बिष्ट को बरी किया जाता है, जबकि दीपक मेहता के विरुद्ध 10 नवंबर 2025 को आरोप तय किए जाएंगे।

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