– पिछले साल सितंबर में इसी पार्षद की गिरफ्तारी के खिलाफ हल्द्वानी कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए थे विधायक
Councilor Amit Bisht hit Nitin Lohani with a white, DDC : जिस पार्षद अमित बिष्ट उर्फ चिंटू के लिए विधायक बंशीधर भगत अपनी ही सरकार में हल्द्वानी कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए थे, रविवार रात उसका असली अंजाम देखने को मिला। उत्तराखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता और सात बार के विधायक बंशीधर भगत के संरक्षण ने चिंटू के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि रविवार रात करीब साढ़े 12 बजे उसने गोली मार कर एक युवक नितिन लोहनी को मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने दो बार के पार्षद चिंटू को हिरासत में ले लिया है। तो क्या विधायक फिर एक बार अपने चिंटू के लिए धरने पर बैठेंगे।
मृतक नितिन लोहनी (24 वर्ष) जज फार्म का रहने वाला था। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पार्षद और मृतक के बीच कुछ दिन पहले विवाद हुआ था। उसी रंजिश के चलते देर रात घर के बाहर कहासुनी हुई, जो फायरिंग में बदल गई। गोली लगने से नितिन गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी पार्षद को हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी पार्षद का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बनी रहती थी। इससे पहले भी उससे जुड़े एक प्रकरण को लेकर राजनीतिक स्तर पर खींचतान देखने को मिली थी, जो काफी चर्चा में रहा था। एसएसपी डॉ.मंजू नाथ टीसी ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि सितंबर 2025 में कुछ लोग बिजली के पोल पर चढ़े थे और तब पोल पर लगी लाइट टेढ़ी हो गई थी। इसी बात पर पार्षद चिंटू बौखला गया था। जमकर मारपीट हुई और इसका एक वीडियो वायरल हुआ। जिसके बाद पुलिस ने पार्षद को गिरफ्तार कर लिया था। इसकी जानकारी विधायक बंशीधर भगत को मिली तो वह लाव-लश्कर के साथ हल्द्वानी कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए थे।
कोतवाली से लेकर तब सीओ रहे नितिन लोहनी ने काफी मिन्नतें की, लेकिन वह धरने से नहीं उठे। एसपी को भी वापस लौटना पड़ा। उस समय एसएसपी रहे प्रह्लाद नारायण मीणा को विधायक को धरने से उठाने के लिए खुद उनके साथ सड़क पर बैठना पड़ा। अंतत: पुलिस को अमित बिष्ट और चिंटू को छोड़ना पड़ा। चिंटू पूरे रौब के साथ कोतवाली से बाहर निकला और इसी का नतीजा है कि रविवार को उसने नितिन लोहनी को मौत के घाट उतार दिया।

