पूछड़ी में कब्जे का किला ध्वस्त, 30 जेसीबी ने ढहाए 81 निर्माण

पूछड़ी रामनगर में वन भूमि से साफ किया गया अतिक्रमण।

– 5 हेक्टेयर वन भूमि से हटाया कब्जा, सुबह से रात तक चला बुलडोजर अभियान; 51 निर्माण पहले चरण में हो चुके थे ध्वस्त

DDC : रामनगर के पूछड़ी में वन भूमि पर खड़े अतिक्रमण के खिलाफ शनिवार को प्रशासन का बुलडोजर पूरी ताकत से गरजा। भारी पुलिस बल की घेराबंदी, 30 से अधिक जेसीबी और डंपरों के साथ पहुंची संयुक्त टीम ने एक के बाद एक 81 अवैध निर्माण जमींदोज कर दिए। करीब पांच हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। सुबह की तैयारी से लेकर रात दस बजे तक चली कार्रवाई में एक हजार से अधिक पुलिसकर्मी और विभिन्न विभागों के कर्मचारी तैनात रहे।

पूछड़ी में वन भूमि पर अतिक्रमण करने वालों के आशियानों पर शनिवार को प्रशासन का बुलडोजर चल गया। दूसरे चरण की इस कार्रवाई में मस्जिद मोहल्ला और मुल्ला पट्टी क्षेत्र के 81 चिह्नित निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। करीब 4 से 5 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए प्रशासन और वन विभाग ने व्यापक इंतजाम किए थे। 30 से अधिक जेसीबी मशीनों ने निर्माणों को ढहाया तो पुलिस के करीब 800 जवानों ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा। अन्य विभागों के कर्मचारियों को मिलाकर मौके पर एक हजार से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे।

शनिवार तड़के करीब साढ़े चार बजे प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम पूछड़ी पहुंच गई थी। प्रभावित लोगों को शाम पांच बजे तक अपना सामान हटाने का समय दिया गया। इसके बाद शाम छह बजे से ध्वस्तीकरण शुरू हुआ। जेसीबी मशीनों ने एक के बाद एक निर्माणों को जमींदोज करना शुरू किया। अभियान रात करीब दस बजे तक चला। इसके बाद मलबा हटाने का काम शुरू कराया गया।

83 की सूची से 81 पर कार्रवाई

तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पुनीत तोमर ने कार्रवाई के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शुरुआत में 83 निर्माणों को चिह्नित किया गया था। जिला प्रशासन और वन विभाग ने दस्तावेजों का कई बार सत्यापन किया। जिन मामलों में न्यायालय से स्थगन आदेश था, जो वन अधिकार अधिनियम की प्रक्रिया के तहत थे अथवा जिनकी बेदखली की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, उन्हें कार्रवाई से बाहर रखा गया। अंतिम रूप से 81 निर्माण ध्वस्तीकरण के लिए चयनित किए गए।

उन्होंने बताया कि भारतीय वन अधिनियम के तहत नोटिस जारी करने, आदेश पारित करने और अपीलों पर सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई की गई। इससे पहले अभियान के प्रथम चरण में अपर कोसी बीट में 51 अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं।

छह वन प्रभागों के कर्मचारी जुटे

इतने बड़े अभियान के लिए वन विभाग ने तराई पश्चिमी के अलावा तराई पूर्वी, तराई केंद्रीय, हल्द्वानी, रामनगर और कॉर्बेट क्षेत्र से कर्मचारी बुलाए थे। डीएफओ से लेकर वन दरोगा, वन रक्षक और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों सहित करीब 50 वनकर्मी तैनात रहे। कानून व्यवस्था के लिए पुलिस के लगभग 800 जवान लगाए गए थे। अन्य विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलाकर यह संख्या एक हजार से अधिक पहुंच गई। ध्वस्तीकरण के लिए 30 से ज्यादा जेसीबी, डंपर और अन्य संसाधन लगाए गए।

डीएफओ पुनीत तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने का अभियान चलाया गया। जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, पीआईयू जमरानी और नगर पालिका का सहयोग मिला। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण रही और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

स्टांप पेपर पर जमीन बेचने वालों पर कार्रवाई कब?

पूछड़ी में लोगों को स्टांप पेपर पर जमीन बेचकर बसाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के सवाल पर डीएफओ ने इसे अलग विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिला स्तर पर कार्रवाई चल रही है और एसआईटी का गठन भी किया गया है। वन विभाग की प्राथमिकता वन भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराकर वापस अपने कब्जे में लेना था।

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