“सूरज” के उजाले से अब रात में जगमगाएगा जंगल

– दूरस्थ वन चौकियों और फायर क्रू स्टेशन को सौर ऊर्जा प्रणाली से जगमगाने की कवायद शुरू

Solar power plants in forest outposts, DDC : उत्तराखंड में अंधेरा जंगल की सुरक्षा के आड़े नहीं आएगा, क्योंकि जंगलात के अधिकारियों ने जंगल की सुरक्षा के लिए अब सूरज की रोशनी को स्टोर करना शुरू कर दिया। मतलब बिजली सुविधा से सीधे तौर पर महरूम रहने वाली वन चौकियां अब रात के अंधेरे में भी न सिर्फ जगमगाएंगी, बल्कि जंगल की सुरक्षा को मजबूत भी करेंगी। ये वो दूरस्थ क्षेत्र की वन चौकियां और फायर क्रू स्टेशन है, जहां बिजली की सुविधा नहीं थी।

हल्द्वानी डिवीजन के डीएफओ कुंदन कुमार के मुताबिक, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूआरईडीए) के तकनीकी सहयोग से दूरस्थ वन चौकियों और फायर क्रू स्टेशन में सौर ऊर्जा पैनल के काम को अमलीजामा पहनाया जा रहा है। जहां अब तक बिजली की अनुपलब्धता के कारण रात्रिकालीन ड्यूटी, संचार साधनों, मोबाइल चार्जिंग और उपकरणों के संचालन में दिक्कत होती थी, वहां अब 24 घंटे स्वच्छ और स्थायी बिजली उपलब्ध होगी।

दुर्गम चौकियों में शामिल इनमें शामिल जामपोखरा वन चौकी (छकाता राजि), दुर्गापीपल वन चौकी (डाण्डा राजि), खोलगड़, गौनियारो वन चौकियां और जौलासाल व ककोड़ चौकियां और फायर क्रू स्टेशन को सोलर संयंत्र से जोड़ दिया गया है। यानी जामपोखरा से ककोड़ तक चौकियों पर आधुनिक सोलर संयंत्र लगा दिए गए हैं। इन सभी स्थलों पर 2 कि.वा. (कुछ स्थानों पर 1 कि.वा.) क्षमता के सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं, जिनमें बैटरी बैकअप, इन्वर्टर, और चार्ज कंट्रोल यूनिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

संचार, गश्त, निगरानी और वनाग्नि नियंत्रण को मिलेगी मजबूती
अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना से वन चौकियों की कार्यक्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। वनकर्मी दिन के साथ रात गश्त, निगरानी और संचार से जुड़े कार्यों को बेहतर ढंग से अंजाम दे सकेंगे। वनाग्नि की सूचना और त्वरित नियंत्रण कार्यवाही में भी तीव्रता आएगी। यह पहल न केवल ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि वन्य जीवन की सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन में भी मददगार साबित होगी।

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